लालू की बेटी के बारे में ये बातें सुनी नहीं होंगी!
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लालू प्रसाद यादव ने लोकसभा चुनावों में अपने दोनों बेटों को दरकिनार कर अपनी बेटी मीसा भारती पर दांव लगाया है। राजनीति के माहिर खिलाडियों में एक लालू ने अपने फैसलों से कई बार चौंकाया है।
मीसा भारती को टिकट देने का फैसला भी उन्हीं में से एक है। लालू ने मीसा को पाटलीपुत्र से उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इस फैसले से पार्टी में बगावत के सुर अभी सुनाई देने लगे हैं। लालू के फैसले के विरोध में राजद नेता रामकृपाल यादव की राजद छोड़ने की सुगबुगाहट है।
रामकृपाल यादव पाटलीपुत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार वे इस सीट से दावेदार थे। हालांकि लालू यादव ने इस विरोध पर कान न देने की ठान ली है, जिसके बाद माना जा रहा है कि राम कृपाल यादव भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
17 साल पहले भी थी मीसा की चर्चा
चारा घाटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिए जा चुके हैं, जिसके बाद कयास थे कि उनके राजनीति विरासत की जिम्मेवारी उनकी बेटों को ही सौंपी जाएगी।
लेकिन, लालू ने बेटों को दरकिनार कर अपनी बेटी को कमान सौंप दी। मीसा भारती लालू प्रसाद यादव की सबसे बड़ी बेटी हैं।
17 साल पहले, जब लालू ने चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तब भी मीसा को ही आरजेडी की कमान सौंपे जाने की चर्चा थी।
हालंकि तब उनकी उम्र बहुत कम थी, इसलिए लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। राबड़ी को मुख्यमंत्री बनाना भी एक चौंकाने वाला निर्णय था।
मीसा के नाम की भी है एक कहानी
जैसे लालू के बारे में कई रोचक किस्से मशहूर हैं, मीसा के नाम की भी रोचक कहानी है। दरअसल, मीसा का जन्म इमर्जेंसी के दिनों में हुआ था।
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में जयप्रकाश नारायण देश भर में आंदोलन चला रहे थे। लालू प्रसाद यादव आंदोलन के बड़े नेताओं में से एक थे। और जेल में बंद थे।
उन्हें MISA (मेंटेंनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत ही जेल में बंद किया गया था। इसी कारण उन्हीं दिनों पैदा हुई पहली बेटी का नाम मीसा रखा गया। लालू को ये नाम प्रभाष जोशी और रामबहादुर यादव ने सुझाया था।
जेल से छूटने के बाद 1977 के चुनाव में लालू जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए थे। तब उनकी उम्र महज 29 वर्ष थी।
पर्दे के पीछे सक्रिय रहीं हैं मीसा
मीसा के राजनीति में आने के कयास कई बार लगे, लेकिन वे सामने कभी नहीं आईं। हालांकि पर्दे के पीछे वे हमेशा सक्रिय रहीं।
पिछले साल मई में लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार की सरकार के विरोध में पटना में एक विशाल रैली की थी। रैली में लालू की बेटों तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव की जैसी सक्रियता थी, उसे उनकी लांचिंग रैली बताया गया था।
लेकिन भाइयों की सक्रियता के बाद भी रैली की तैयारियों की पूरी जिम्मेदारी मीसा ने ही संभाल रखी थी। 38 साल की मीसा का राजनीति में वो पहला बड़ा इम्तहान था और उसमें वे लगभग पास रही थीं।
उन्हीं दिनों मीसा ने पत्रकारों से बातचीत में ये माना था कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव से कुछ गलतियां हुई हैं।