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जस्टिस मेहता ने ठुकराया गुजरात लोकायुक्त का पद
अहमदाबाद/एजेंसी
Updated Wed, 07 Aug 2013 06:33 PM IST
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जस्टिस आरए मेहता ने गुजरात के लोकायुक्त के पद को संभालने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसके पीछे अपनी नियुक्ति के खिलाफ राज्य सरकार की कानूनी लड़ाई को वजह बताया है। गुजरात हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज ने खुद को सरकार विरोधी और पक्षपाती कहने के लिए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना भी की।
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जस्टिस मेहता ने राज्यपाल कमला बेनीवाल को लिखे पत्र में कहा, ‘नियुक्ति अपनी गरिमा खो चुकी है। इसलिए वह इस पद को स्वीकार नहीं कर सकते। मैं गुजरात के लोकायुक्त के रूप में दी गई अपनी सहमति विनम्रतापूर्वक वापस लेता हूं और पदभार ग्रहण करने से इंकार करता हूं। कृपया मेरा आग्रह स्वीकार कीजिए और मुझे कार्यमुक्त कीजिए।’
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राज्य सरकार की मर्जी के खिलाफ गवर्नर बेनीवाल ने मेहता को 25 अगस्त, 2011 को लोकायुक्त नियुक्त किया था।
इस फैसले को वापस करने के लिए राज्य सरकार ने लगभग दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी और अंत में उनकी क्यूरेटिव याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए मेहता ने कहा, ‘मुझ पर सरकार विरोधी होने के आरोप लगे, जिससे मुझे गहरा आघात पहुंचा है। कुछ लोग सोचते हैं कि अगर कोई व्यक्ति सरकार के साथ नहीं है, तो वह निश्चित तौर पर सरकार विरोधी है। वह इस बात को स्वीकार नहीं करते एक तीसरी श्रेणी भी होती है।’
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उन्होंने लिखा, ‘सुप्रीम कोर्ट के तीन आदेशों के बाद भी राज्य सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हिचकिचाती रही, जो कि मेरे लिए बड़ी हैरानी की बात है। मैं स्पष्ट रूप से स्वीकार करता हूं कि मैं संबंधित परिस्थितियों में जनदायित्व नहीं निभा पाऊंगा और लोकायुक्त से जुड़ी जन आवश्यकताओं तथा जन आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पाऊंगा।’
मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार द्वारा उन्हें लोकायुक्त का पदभार संभालने के लिए आमंत्रित करने के तरीके की आलोचना की।
उन्होंने पत्र में लिखा, ‘गुजरात सरकार के 26 जुलाई, 2013 के पत्र में (यह मेरे अहमदाबाद स्थित आवास पर तब मिला जब मैं अमेरिका में था) सरकार द्वारा किसी आमंत्रण या रुचि का संकेत नहीं है।’