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प्रमोशन में आरक्षण पर भाजपा में भारी मतभेद

Tue, 18 Dec 2012 09:48 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 18 Dec 2012 09:48 PM IST
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quota in promotion differences among bjp members

सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा में तीखे मतभेद उभर आए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन समेत बड़ी संख्या में सांसदों ने राज्यसभा में इस विधेयक का समर्थन करने पर सवाल उठाया है।

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मंगलवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक में इन सांसदों ने एक सुर में पूछा कि इस विधेयक का समर्थन करने का फैसला किस फोरम में लिया गया। नाराज भाजपा सांसदों ने यहां तक कह दिया कि बिना चर्चा पार्टी को मायावती की ‘झोली’ में डालने का फैसला कैसे कर लिया गया।
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संसदीय दल में उपजे मतभेद के चलते अब लोकसभा में इस विधेयक के समर्थन को लेकर भाजपा की दुविधा बढ़ गई है। हालांकि राज्यसभा में पार्टी इसका समर्थन कर चुकी है। भाजपा सांसदों को इस विधेयक से अपने सवर्ण वोट बैंक के खिसक जाने का खतरा दिख रहा है, क्योंकि सपा इस विधेयक का विरोध कर रही है और भाजपा को अपना वोट बैंक सपा के पाले में जाने का खतरा दिख रहा है। इसलिए संसदीय दल की बैठक में सांसदों का गुस्सा फूट पड़ा और विद्रोह जैसी स्थिति पैदा हो गई।
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जोशी व टंडन ही नहीं, बल्कि कीर्ति आजाद समेत बड़ी संख्या में सांसद काफी मुखर थे। बैठक में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली निरुत्तर दिखे। बाद में पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने स्वीकार किया कि संसदीय दल की बैठक में मतभेद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा हुई और अलग-अलग विचार सामने आए।


सूत्रों के अनुसार बैठक में सांसदों के सबसे ज्यादा निशाने पर जेटली ही रहे। राज्यसभा में जेटली ही सबसे पहले विधेयक के समर्थन में बोले थे। उत्तर प्रदेश व बिहार से लेकर दक्षिणी राज्यों के सांसद इस बात से नाराज थे कि पार्टी में बिना आंतरिक चर्चा के  ही राज्यसभा में इस विधेयक के समर्थन का एकतरफा फैसला कैसे कर दिया गया। जेटली को निशाने पर लेते हुए कई सांसदों ने बगैर उनका नाम लिए यहां तक कह दिया कि जिन लोगों को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना है, उन्हें जमीनी सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है।

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