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मुजफ्फरनगर से माया की दूरी पर उठे सवाल
धीरज कनोजिया/दिल्ली
Updated Sat, 19 Oct 2013 08:24 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगों में दलितों के प्रभावित होने के बावजूद मायावती और उनके सिपहसालारों के क्षेत्र का दौरा नहीं करने को लेकर बसपा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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क्षेत्र से सबसे ज्यादा सांसद और विधायक होने के बावजूद मायावती की इस क्षेत्र से दूरी को लेकर उंगलियां उठने लगी हैं। मगर बसपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का तर्क है कि मायावती की राजनीति का अंदाज दूसरों से अलग है। वह कभी किसी भी घटना के तुरंत बाद मौके पर नहीं पहुंचतीं। न ही मीडिया में सुर्खियां बटोरना उनका मकसद है।
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बसपा नेताओं का कहना है कि दंगों को लेकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग को लेकर सिर्फ बसपा ही राष्ट्रपति के पास गई। किसी राजनीतिक दल ने ऐसा नहीं किया।
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साथ ही बसपा नेता कहते है कि सपा सरकार द्वारा उनके नेताओं को फर्जी मामले में न फंसाए जाने से बचने के लिए भी हाईकमान की ओर से नेताओं को संयम और सावधानी बरतने को कहा गया। सांसदों और विधायकों को भूल से भी विरोध-प्रदर्शनों में नहीं जाने के निर्देश दिए गए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बसपा के सात सांसद और 33 विधायक हैं। फिर भी सांसद और विधायकों ने दंगे के बाद भी इस क्षेत्र से दूरी बनाए रखी। क्षेत्र से मिली रिपोर्टों की माने तो दलित वर्ग का रूझान भाजपा की ओर बढ़ने लगा है।
बसपा नेताओं की दूरी को लेकर बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर उजाला से कहा कि उस समय विपक्ष के किसी नेता को वहां जाने की प्रदेश सरकार की ओर से अनुमति नहीं दी गई थी। सोनिया और राहुल प्रधानमंत्री के साथ वहां गए थे।
वहीं सांसदों, विधायकों और कार्यकर्त्ताओं के बारे में उनका कहना है कि बसपा हाईकमान ने सावधानी बरतने के निर्देश दिए थे कि कोई भी नेता विरोध, प्रदर्शन और आंदोलन में न जाए, क्योंकि सपा सरकार उनके लोगों को जेल में डालने के लिए तैयार बैठी थी। कई विधायकों को झूठे मामलों में फंसाया गया है।
अब मामला कुछ शांत होने के बाद मायावती, विधायकों और सांसदों के दौरे के सवाल पर मौर्य कहते है कि पार्टी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अनुच्छेद 356 लगाने की मांग की थी। दलित वोट बैंक के बसपा से दूर जाने को लेकर उनका कहना है कि वहां की जनता जानती है कि सपा और भाजपा ने वोटों के लिए मिलकर दंगे करवाए हैं। बसपा के एक वरिष्ठ सांसद ने दावा किया कि दंगों के बाद क्षेत्र के बदले सियासी समीकरणों में सबसे ज्यादा फायदा बसपा को हो रहा है।