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एक ही मामले में दोनों पक्षों की पैरवी कर रहे वकील, सुप्रीम कोर्ट सख्त

Wed, 16 Sep 2015 08:48 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Sep 2015 08:48 AM IST
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questions on senior advocate vikas singh

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के कभी एक पक्ष तो कभी दूसरे पक्ष की ओर से पैरवी किए जाने के कदम को पेशेवर सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया है।

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कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह हितों का टकराव नहीं है कि कोई वकील एक बार किसी एक पक्ष तो कभी दूसरी पक्ष की पैरवी करे। इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शीर्ष कोर्ट ने हमेशा के लिए इसका समाधान निकालने का फैसला किया है।
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कोर्ट इस मसले पर 18 सितंबर को सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मसले पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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शुक्रवार को होगी सुनवाई

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इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने इसी शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील विकास सिंह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पैरवी कर रहे थे।

वह पंजाब स्थित चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की एक के बाद एक खामी पीठ को बता रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने पीठ को बताया कि पिछले अकादमिक सत्र में विकास ने इसी मेडिकल कॉलेज की ओर से जिरह की थी और उसकी खूबियां गिनाई थी।

इस पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने विकास सिंह से कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। आपको इस मामले से अलग हो जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि यह तो हितों के टकराव का मामला दिखता है और यह पेशेवर सिद्धांत के विपरीत है।

इस पर विकास सिंह ने कहा कि वह पिछले अकादमिक सत्र में कॉलेज की ओर से पेश हुए थे। हालांकि पीठ ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया। इसके बाद विकास सिंह ने कहा कि वह अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखेंगे।

नरीमन से मदद का अनुरोध

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पीठ ने वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन से इस मसले पर कोर्ट की मदद करने का अनुरोध किया है। पीठ ने कहा कि इस संबंध में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन से भी राय जाननी चाहिए। सिब्बल ने ऐसे मामलों को पेशेवर सिद्धांत के खिलाफ बताया।

कोर्ट ने क्या कहा
वरिष्ठ वकील विकास सिंह के एक ही मामले में दोनों पक्षों की तरफ से पैरवी किए जाने की बात पता चलने पर पीठ ने कहा कि अगर वरिष्ठ वकील ऐसा करेंगे तो जूनियर वकीलों में इसका क्या संदेश जाएगा।

यह गंभीर मसला है, लिहाजा इस मुद्दे का हल हमेशा के लिए निकालना जरूरी है। जब आप कॉलेज की ओर से पैरवी कर रहे होंगे तो आपके पास अच्छी खासी जानकारी होगी, ऐसे में आप दूसरे पक्ष की ओर से पैरवी कैसे कर सकते हैं।

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