भारत में सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने पर सवाल
दुनिया के उन चुनिंदा देशों में भारत भी शामिल हैं, जहां सरोगेसी यानी किराए की कोख लेने की इजाजत है। हाल के सालों में सरोगेसी के लिए विदेशियों के बीच भारत काफी लोकप्रिय हुआ है।
हालांकि अक्टूबर में भारत सरकार ने विदेशियों के लिए किराए की कोख लेने पर प्रतिबंध लगा दिया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम का कहना है कि सरोगेसी से गरीब और अशिक्षित महिलाओं का शोषण किया जाता है।
साथ ही यह उनकी गरिमा के खिलाफ है। वहीं, इसके सरोगेट मांओं समेत इससे जुड़े लोग इस पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ है। ऐसे में देखना यह है कि विदेशियों के लिए किराये की कोख लेने की दिशा में भारत क्या कदम उठाया जाएगा?
भारत में करीब दो अरब डॉलर का है सरोगेसी कारोबार
भारत को दुनिया की सरोगेसी राजधानी के रूप में जाना जाता है। देश भर में करीब तीन हजार सरोगेसी गृह हैं। यहां सरोगेसी का सालाना कारोबार करीब दो अरब डॉलर (136 अरब रुपये से ज्यादा) का है। भारत में अब इस संबंध में एक कानून प्रस्तावित है।
इसके पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि सरोगेसी से गरीब और अशिक्षित सरोगेट मांओं का शोषण हो रहा है। सरोगेसी गृहों की ओर से सरोगेट मांओं को कम पैसा देने और गर्भधारण के दौरान तक बंधक बनाने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
यह कानून संतान की इच्छा रखने वाले विदेशियों के लिए करारा झटका है। दूसरी बार किराए की कोख देने वाली 28 वर्षीय शबनम का कहना है कि इस कानून के पारित होने से उसकी आजीविका ही छिन जाएगी। हाल ही दिल्ली में सरोगेसी गृह खोलने वाली बजरंग सिंह का कहना है कि इस कानून के पारित होने से सरोगेट मांएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
दिल्ली के सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी का कहना है कि सरोगेसी के संबंध में कड़े कानून बनाना और उसका प्रभावी ढंग से लागू कराना सरोगेट मांओं का शोषण रोकने का बेहतरीन तरीका होगा। हालांकि इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।