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दिल्ली गैंगेरेपः महिला बाल विकास मंत्रालय कठघरे में

Mon, 31 Dec 2012 09:13 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 31 Dec 2012 09:13 AM IST
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question raises on women and child development ministry in delhi gang rape

चलती बस में युवती के साथ हुए गैंगेरेप और उसकी मौत से भले ही जनता का आक्रोश सड़कों पर निकल रहा हो, लेकिन महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकार के लिए लड़ने को तैयार किया गया महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग का प्रदर्शन इस पूरे मामले में उदासीन रहा है।

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मंत्रालय या आयोग कैसे न्याय दिला सकेगा?
इनकी ओर से पीड़ित या उनके परिजन के लिए कुछ विशेष नहीं किए जाने से देश के कई महिला संगठन नाराज हैं। उनका कहना है बलात्कार मामले में अब तक के सबसे हाई प्रोफाइल मामले में इनकी भूमिका पिछले पायदान पर रही है, तो आए दिन होने वाली वारदातों के खिलाफ मंत्रालय या आयोग कैसे न्याय दिला सकेगा?
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महिलाओं के मुद्दों पर काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने साफ तौर पर कहा है कि इस पूरे मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने मंत्रालय की अहमियत को दर्शाते हुए कुछ ठोस कदम नहीं उठाए। दूसरी ओर महिला आयोग की भूमिका भी निराशाजनक रही है। महत्वपूर्ण यह है कि पीड़ित के परिजन की आर्थिक सहायता के लिए सरकार ने अब तक चुप्पी साध रखी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास भी फिलहाल इस तरह की कोई योजना नहीं है।
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एक अन्य प्रमुख महिला संगठन ने कहा कि सत्ताधारी दल की ओर से तमाम आयोग के अध्यक्षों की नियुक्ति होने के कारण वे दंतविहीन हैं। हालांकि वह अपनी बात रखने को स्वतंत्र हैं। मगर सरकार के एजेंडे के खिलाफ जाने की हिम्मत इनमें नहीं है। महिला संगठनों का कहना है कि महिला एवं बाल आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति सत्ताधारी दल की ओर से नहीं होनी चाहिए।

'सिफारिशों पर अमल करना सरकार का काम'
महिलाओं की सुरक्षा का आधिकारिक तौर पर जिम्मा उठाने वाले महिला आयोग से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह दलील दी कि आयोग की सिफारिशें सरकार के पास जाती हैं। इस पर अमल करना सरकार का काम है। आयोग की ओर से बलात्कार मामले में भारतीय दंड संहिता में संशोधन, आरोपियों को जमानत नहीं देने और पुलिस ट्रेनिंग समेत कई सुझाव पहले ही दिए जा चुके हैं। मगर अंतिम निर्णय इस मसले पर केंद्र को ही लेना है।


सूत्रों की माने तो गैंगरेप के मामले में भले ही गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पुलिस महकमे की ओर से कई योजनाएं बनाई जा रही हों, लेकिन अभी तक राष्ट्रीय महिला आयोग से इस संदर्भ में कोई सुझाव नहीं लिया गया है।

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