{"_id":"b8dec86c-1800-11e2-8947-d4ae52bc57c2","slug":"question-raises-on-official-reports-of-salman-khurshid-trust","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुर्शीद ट्रस्ट: विकलांग विभाग की रिपोर्ट संदेह के घेरे में","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
खुर्शीद ट्रस्ट: विकलांग विभाग की रिपोर्ट संदेह के घेरे में
बुलंदशहर/एटा/ब्यूरो
Updated Wed, 17 Oct 2012 07:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकलांगों को वितरित किए गए उपकरणों में घपले की परतें एक-एक कर उधड़नी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट के घपले की जांच भी संदेह के घेरे में आ गई है। 42 लाभार्थियों में से जिन पांच को उपकरण देने का दावा अधिकारी कर रहे थे, सत्यापन में उन्होंने भी इससे इंकार किया है।
विज्ञापन
डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट से मिलने वाले उपकरणों का कहीं अता-पता नहीं है। विकलांग कल्याण निदेशक की जांच में खुलासा हुआ है कि 42 में से मात्र पांच को ही उपकरण दिए गए थे। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी ने जहांगीराबाद के गांव प्रेमपुर के जुम्मा खां बरहाना की प्रीति और मुन्नी बेगम, वैरा फिरोजपुर के नवीन शर्मा और धनियावली की चन्द्रो देवी को उपकरण मिलने की बात अपनी रिपोर्ट में कही थी। यह जांच रिपोर्ट बीडीओ स्याना ने तैयार की थी।
विज्ञापन
‘अमर उजाला’ की टीम को सत्यापन में सब गड़बड़ मिला। मुन्नी बेगम, कुमारी प्रीति, नवीन शर्मा और चन्द्रो देवी ने बताया कि उनको न तो जहांगीराबाद कैंप में उपकरण मिले थे और न ही उनके पास जांच को कोई अधिकारी पहुंचा।
विज्ञापन
दूसरा कारनामा
ट्रस्ट ने पहले गांव बुहानपुर के पात्रों को उपकरण देने की बात कही थी, जोकि जनपद में है ही नहीं। ऐसा ही दूसरा कारनामा ट्रस्ट के साथ विकलांग कल्याण विभाग ने भी कर दिखाया है। जहांगीराबाद के मोहम्मद जुम्मा खां पुत्र नादिर खां निवासी प्रेमपुर को उपकरण दिया जाना दर्शाया है। अधिकारियों ने सत्यापन कर इसकी पुष्टि भी की है। जबकि जहांगीराबाद में प्रेमपुर नाम का कोई गांव नहीं है और न ही जुम्मा खां।
अलीगंज में भी फर्जी हस्ताक्षर
सलमान खुर्शीद के संसदीय क्षेत्र में आने वाले अलीगंज में पांच मई, 2010 को आयोजित विकलांग सहायता शिविर में 21 विकलांगों को ट्राईसाइकिल, व्हील चेयर आदि का वितरण दर्शाया गया है। निदेशालय के निर्देश पर हुई जांच में शिविर से संबंधित रिपोर्ट और पत्रावली पर तत्कालीन तहसीलदार एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। दोनों अधिकारियों ने ऐसी किसी सूचना एवं हस्ताक्षरों से इनकार किया है।
प्रभारी जिला विकलांग अधिकारी अजयवीर सिंह यादव ने बताया कि एक अन्य शिविर 10 सितंबर, 2011 को जैथरा विकास खंड के ग्राम बरना में आयोजित होना दर्शाया गया है। इसकी सूची एवं फोटो भी उपलब्ध कराए गए हैं। शीघ्र ही इसकी जांच पूरी हो जाएगी।
इनकी सुनिए-
मैंने कोई सत्यापन नहीं किया है। पिछले कुछ दिनों से ही यहां तैनात हूं। इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। -राजेन्द्र सिंह, बीडीओ स्याना।
मुझको किसी जांच रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। मैंने कोई जांच नहीं की है और न ही इस संदर्भ में किसी पत्राचार/आदेश का जवाब तैयार किया है।
-शिवचरण त्यागी, पूर्व बीडीओ स्याना
मुझको कुछ समय पहले ही विभाग का चार्ज मिला है। फाइल में स्याना बीडीओ की जांच रिपोर्ट लगी है।
-एसके गौतम, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी