आप नेता आशुतोष के आंसुओं पर क्यों उठ रहे सवाल?
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आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष टीवी चैनल पर फूट-फूट कर रोए। गुरुवार को एक टीवी चैनल पर दौसा के किसान गजेंद्र सिंह की आत्महत्या पर दुख व्यक्त करते हुए वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए।
टीवी चैनल ने गजेंद्र सिंह की मौत पर चर्चा रखी हुई थी, जिसमें उनकी बेटी मेघा सिंह भी मौजूद थीं। मेघा सिंह के एक सवाल के जवाब में आशुतोष टीवी चैनल पर फूट-फूट कर रोए। आशुतोष को रोते देख एक बारगी गजेंद्र की बेटी मेघा भी अवाक रह गईं, लेकिन उनके रोने का सिलसिला नहीं रुका।
आशुतोष ने अपने आंसुओं के बीच कहा कि वह और उनकी पार्टी के नेता उस रात सो भी नहीं पाए थे, जिस दिन गजेंद्र सिंह की मौत हुई। उन्होंने खाना भी नहीं खाया। आशुतोष ने कहा, 'मैं नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, सोनिया गांधी और अजय माकन से माफी मांगता हूं, वे इस मुद्दे पर राजनीति ना करें।'
हालांकि आशुतोष के आंसुओं पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया में आशुतोष के आंसुओं की खिल्ली उड़ाई जा रही है। आम आदमी पार्टी के अंदरखाने से जो खबर आई है, वह भी कम चौंकाने वाली नहीं है।
आशुतोष के आंसुओं का राज क्या है?
सोशल मीडिया पर आशुतोष के आंसुओं का मजाक उड़ाया जा रहा है। ट्विटर पर #AshuCries ट्रेंड कर रहा है। वहीं आम आदमी पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आशुतोष के ये आंसू गजेंद्र की मौत पर अफसोस जताने से अधिक अपना प्रवक्ता पद बचाने को कोशिश हैं।
सूत्रों के गुरुवार को आम आदमी पार्टी की बैठक में गजेंद्र की मौत पर चर्चा हुई थी।
बैठक में गजेंद्र की मौत के बाद आए आशुतोष के बयान का मुद्दा भी उठा। आशुतोष ने बुधवार की रैली में गजेंद्र की मौत के बाद कहा था कि भविष्य में ऐसी घटना हुई तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद पेड़ पर चढ़कर जान बचाएंगे।
आशुतोष के बयान की काफी आलोचना हुई थी, जिसके बाद उन्होंने ट्विटर पर अपने बयान के लिए माफी भी मांगी। आम आदमी पार्टी की बैठक में आशुतोष के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई गई।
यों तैयार हुई आशुतोष के आंसुओं की पटकथा
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ये तय किया गया कि गजेंद्र की मौत से आम आदमी पार्टी के खिलाफ बने माहौल की भरपाई आशुतोष को प्रवक्ता पद से हटाकर की जाए।
हालांकि आशुतोष ने इस मामले आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। अरविंद केजरीवाल ने आशुतोष के सामने शर्त रखी कि अगर वह आप के खिलाफ बने माहौल को किसी प्रकार सहानुभूति में बदल सकें, तो ही उन्हें प्रवक्ता पद पर बनाए रख सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि आशुतोष ने उसी के बाद मीडिया के पुराने संबंधों का प्रयोग कर 'आंसू-कांड' की पटकथा तैयार की। आशुतोष टीवी चैनल पर काफी देर तक फूट-फूट कर रोते रहे।