‘भारत पर राज करने के लिए चाहिए मां जैसा दिल’
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जल, जंगल और जमीन आंदोलन के नायक पीवी राजगोपाल ने देश भर में बहस का मुद्दा बनी असहिष्णुता पर अपनी बेबाक राय रखी।
उन्होंने कहा कि बहुभाषी, विभिन्न संस्कृतियों को समेटे भारत पर वही राज कर सकता है जो अपने सीने में एक मां के जैसा दिल रखता हो। उन्होंने पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों का तिरस्कार करने के बजाय उनकी तकलीफ को समझने की राय दी।
राजगोपाल कृष्ण नगर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में ग्लोबल नैतिक शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित पर्यावरण और युवा पीढ़ी विषयक संगोष्ठी में शामिल होने आए थे।
यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो साहित्यकार, कवि अपना सम्मान लौटा रहे हैं, उनको बुलाकर उनकी तकलीफ समझनी चाहिए। उन्होंने कई ऐसे देशों का उदाहरण दिया जो केवल दो भाषी होने के चलते ही विखंडित हो गए। भारत में कई भाषा, धर्म, संस्कृति होने के बाद भी देश की एकता को अनूठा बताया।
पीवी राजगोपाल ने कहा कि इस देश पर राज करने वाले का दिल मां के दिल जैसा होना चाहिए। मां अपने सभी बच्चों से समान प्रेम करती है और उनकी उन्नति के लिए प्रयासरत रहती है।
एक सवाल के जवाब में पीवी राजगोपाल ने कहा प्रधानमंत्री को राज्य विशेष के चुनाव में हार जीत की चिंता छोड़कर पूरे देश के बारे में समानता से सोचना चाहिए। उनके आंदोलन के बाद भूमि अधिग्रहण कानून में जो संशोधन हुए उन्हें फिर से हटाया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है उसका विकास मॉडल स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेसवे नहीं हो सकते। इस अवसर पर उनके साथ स्वामी नारायण दास भी थे।
2018 में 10 लाख लोग करेंगे दिल्ली तक पदयात्रा
एकता परिषद के संस्थापक पीवी राजगोपाल ने गोष्ठी में कहा कि विकास के नाम पर विनाशलीला की जा रही है। धरती के साथ हिंसा हो रही है। अगर समय रहते नहीं चेते तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना होगा।
उन्होंने कहा कि शहरी लोग बर्बादी का बड़ा कारण बन रहे है। गंगा, यमुना, सरस्वती सहित सभी नदियां, वृक्ष, पर्वत संकट में है। समूचे विश्व के लिए एक चेतावनी है। भारत को बचाने के लिए वर्ष 2018 में दस लाख लोग दिल्ली तक पदयात्रा करेंगे। इसके बाद ‘विश्व बचाओ’ नारे के साथ दिल्ली से जेनेवा तक पदयात्रा होगी।
गोष्ठी में राजगोपाल ने स्कूली बच्चों से सीधा संवाद किया। उन्होंने विनोबा भावे का उदाहरण दिया और गीत ‘जय जगत-जय जगत-जय जगत, जय जगत पुकारे जा, सर अमन पर वार जा, सबके हित के वास्ते अपना सुख बिसार जा। न्याय का विधान हो, सबका हक समान हो, सबकी अपनी हो जमीन, सबका आसमान हो’ गाकर जोश भर दिया।
इससे पूर्व संस्था ‘फ्रेंड्स ऑफ वृंदावन’ के जगन्नाथ पोद्दार, गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, साहित्यकार मोहन स्वरूप भाटिया, बीवी मधुसूदन, इंद्रभूषण, शिक्षक उमेश पाल ने पर्यावरण पर विचार रखे। अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी नारायण दास ने पर्यावरण रक्षा का संकल्प दिलाया।
अगले आंदोलन से हिल जाएगी दुनिया: राजगोपाल
जल जंगल जमीन आंदोलन के नेता राजगोपाल बुधवार की देर शाम राधारानी ब्रज यात्रा के पड़ाव नगला हसनपुर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि यमुना आंदोलन की अगली लड़ाई सबसे बड़ी होगी। यमुना का जल हर हाल में निर्मल होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि अगली लड़ाई में 10 लाख लोग शामिल होंगे। शक्ति दिखाने पर ही सरकारें सुनेंगी।
राधारानी भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने यमुना आंदोलन में अपनी भागीदारी की चर्चा करते हुए कहा कि वह यमुना भक्तों के साथ हैं। अब अगली लड़ाई में लाखों भक्त शामिल होंगे और दुनिया के सबसे बड़े आंदोलनों में से यह एक होगा।
राजगोपाल ने कहा कि हथिनीकुंड में बंधक बनी यमुना मइया को मुक्त करना ही होगा। संबोधन के बाद राजगोपाल ने संत रमेश बाबा, राधाकांत शास्त्री आदि के साथ आंदोलन को लेकर विचार-विमर्श किया। इस मौके पर संत रमेश बाबा ने भी भक्तों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार यमुना पर गंभीर नजर नहीं आ रही है।