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चीनी भी सिर झुकाते हैं पंजाबी सैनिक के मंदिर में

Tue, 02 Apr 2013 11:54 AM IST
नाथूला दर्रे से लौटकर आशीष तिवारी
नाथूला दर्रे से लौटकर आशीष तिवारी Updated Tue, 02 Apr 2013 11:54 AM IST
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Punjabi soldiers bow to Chinese temple
सिक्किम के नाथूला दर्रे पर बने पंजाबी सिख सैनिक बाबा हरभजन सिंह के मंदिर में चीनी सेना भी सिर झुकाती है। भारतीय सेना के जवान हरभजन सिंह की मौत के बाद सेना ने उनका मंदिर बनवाया है।
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पूरी सेना भगवान की तरह उनकी पूजा करती है। दुनिया का यह इकलौता मंदिर है जहां किसी सिख सैनिक की पूजा की जाती है। ऐसा कोई सिपाही और अधिकारी नहीं है जो भारत-चीन बार्डर पर चौदह हजार फुट की ऊंचाई के बर्फीले रेगिस्तान में बने बाबा के मंदिर में मत्था न टेकता हो।
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पंजाब के कपूरथला जिले के कूका गांव में पले बढ़े जवान हरभजन सिंह को जो सम्मान भारतीय सेना में मिला, वह इतिहास बन गया। इस मंदिर में लोगों को प्रसाद देने की ड्यूटी पर तैनात सूबेदार संजीव कुमार ने बताया कि बाबा सेना के लिए आस्था के प्रतीक हैं। महज दो साल नौकरी करके वे 1968 में एक दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे थे।
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वे बताते हैं कि बाबा की आत्मा आज भी इस इलाके में हर वक्त मौजूद रहती है। उन्होंने बाबा के मंदिर में बने उनके बेड रूम को दिखाते हुए कहा कि आज भी रोज उनका कमरा सोने के लिए तैयार किया जाता है और हर सुबह बेड की चादर सिमटी हुई मिलती है।

सेना के जवानों को वे आज भी हर वक्त अलर्ट करते हैं। बाबा की मौत के पैंतालीस साल बाद भी उनको प्रमोशन मिलता रहा। हर साल उन्हें सालाना छुट्टी दी जाती है। बाबा हरभजन सिंह के नाम पर न्यू जलपाईगुड़ी से ट्रेन में बाकायदा फर्स्ट एसी में सीट बुक होती है। उसमें बाबा की वर्दी और जूतों तथा अन्य जरूरी सामान सेना के एक जवान की देखरेख में पंजाब के कपूरथला स्थित कूका गांव के लिए रवाना किया जाता है।


बार्डर पर होने वाली भारत और चीन की फ्लैग मीटिंग में बाबा हरभजन के लिए एक अलग से कुर्सी रखी जाती है। सेना में माना जाता है कि बाबा चीनी सेना की नापाक कोशिशों को भारतीय सेना को तीन दिन पहले और भारत से बिगड़ने वाले रिश्तों की जानकारी चीनी सेना को दो दिन पहले दे देते हैं ताकि युद्ध के बजाय कोई हल निकल सके।


ऐसे बना बाबा का मंदिर
हरभजन सिंह की मौत सिक्किम के इलाके में तैनाती के दौरान घोड़ों को ले जाते वक्त नदी में गिरने से हो गई थी। अपनी मौत की जानकारी हरभजन सिंह ने सेना के अधिकारियों को दी। उसके बाद सेना को समय समय पर बाबा तमाम जानकारियां उपलब्ध कराते रहे और अलर्ट करते रहे। सेना ने इसके बाद ही बाबा का मंदिर बनवाया।
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