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अभी और बढ़ेंगे दाल के दाम, जानिए क्या है वजह

Fri, 16 Oct 2015 07:53 PM IST
राजेश चतुर्वेदी
राजेश चतुर्वेदी Updated Fri, 16 Oct 2015 07:53 PM IST
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अच्छे दिनों की बांट जोह रहे आम आदमी के भोजन की थाली और महंगी हो सकती है। आम आदमी की थाली का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली अरहर की दाल के दाम आसमान छूने लगे हैं। पिछले एक साल में करीब दो गुने से भी ज्यादा वृद्धि दर्ज करते हुए अरहर की दाल 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

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त्यौहारों के करीब आने से दामों में और उछाल आने की आशंका बनी हुई है। अरहर जिसे तुअर या येलो दाल भी कहा जाता है, की देश में पैदावार मांग के मुकाबले काफी कम है और हर साल इसका आयात करना पड़ता है। इस साल समय रहते दाल का आयात न होने के कारण स्थिति तेजी से खराब हुई।
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कीमतों में हुई उछाल में खराब मॉनसून भी एक बड़ी वजह है। कंपनियों के समूह एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार, दीवाली के समय तक दालों के दाम में 10 से 15 प्रतिशत की और वृद्धि हो सकती है। थोक व्यापारियों का कहना है कि अभी मिल कारोबारी 140 रुपये प्रति किलो के भाव में अरहर खरीद रहे हैं। दाल तैयार होने के बाद थोक और फुटकर कारोबारी से होते हुए यह उपभोक्ता को 180 से 200 रुपये के भाव में मिल रही है।
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जानकार बताते हैं कि चंद बड़े किसान ही फसल को स्टॉक कर पाते हैं। सारे सूत्र बिचौलियों और बड़े कारोबारियों के हाथ में होते हैं। दाल चावल विक्रेता मोतीराम वाधवानी कहते हैं, "टाटा, रिलायंस और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियां जब खरीदार हो जाती हैं तो दाम खुद ब खुद बढ़ने लगते हैं।"

"यदि सरकार बड़े घरानों को बीच से हटा दे तो दाल पुराने रेट पर लौट आएगी। जब तक यह नहीं होगा, विदेश से आने वाली दाल से भी कोई खास अंतर नहीं पड़ने वाला। जो माल आया है, वो पहले इन बड़े लोगों के गोदामों में पहुंच रहा है।"

'क्यों उगाएं दाल?'

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मध्यप्रदेश में पिपरिया की तुअर (अरहर) दाल अपने स्वाद के लिए देशभर में जानी जाती है। यहां के किसान शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' ने बीबीसी से कहा, "दाम बढ़ने के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।

दलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए वह कोई प्रोत्साहन नहीं देती। तुअर की फसल आठ माह में तैयार होती है। किसान साल भर में एक फसल लेने की तरफ क्यों आकर्षित होगा? मैंने इस बार 50 रुपये किलो के भाव में तुअर बेची थी।"

वो कहते हैं, "मिल और बाजार के दूसरे खर्चों को जोड़ने के बाद भाव बहुत से बहुत 70 रुपये होना था, लेकिन ऐसा नहीं है। दामों में भले आग लगी हो, मगर किसान तो आत्महत्या कर रहा है।"

दाल कारोबारी शंकर सचदेव के अनुसार, बड़े स्टॉकिस्ट जब से इस धंधे में उतरे हैं दाल का गणित गड़बड़ा गया है।

मध्यप्रदेश में पैदावार बढ़ी

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देश में अरहर दाल की कुल पैदावार का 10 प्रतिशत मध्य प्रदेश में पैदा होता है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, पिछले चार सालों में इसका रकबा 15 हजार हेक्टेयर कम हुआ, लेकिन पैदावार में बढ़ोत्तरी हुई।

पैदावार में 353 किलो प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई। पिछले साल 981 किलो प्रति हेक्टेयर रिकॉर्ड पैदावार दर्ज की गई। इस साल अरहर की फसल का रकबा 58 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। लेकिन यहां भी दालों के दाम आसमान पर हैं।

कृषि विभाग के अफसर दबी जुबान में होर्डिंग को इसका जिम्मेदार ठहराते हैं।

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