'बेतहाशा बढ़ी आबादी ने बढ़ा दी दाल की कीमतें'
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देश में बढ़ती महंगाई पर राजग सरकार भी अपनी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की भाषा बोलने लगी है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में महंगाई बढ़ने के लिए लोगों के खुराक और आमदनी बढ़ने को जिम्मेदार ठहराया गया था तो अब वर्तमान उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान इसके लिए बढ़ती आबादी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
लोकसभा में उन्होंने दालों की आसमान छूती कीमतों के लिए जहां देश की बढ़ती आबादी को जिम्मेदार ठहराया, वहीं दूसरे बड़े कारण के रूप में जमाखोरी को गिनाते हुए इसका ठीकरा राज्य सरकारों पर भी फोड़ दिया।
इस दौरान पासवान ने दाल आयात में धांधली की बात स्वीकारी। कहा कि आयात करने वाले दालों का स्टॉक विदेशी पोर्ट पर जमा कर इसे धीरे धीरे यहां लाते हैं। इसके साथ ही यह भी जोड़ा कि इनके खिलाफ भी कार्रवाई राज्य सरकार को ही करना है। हालांकि इस दौरान सरकार की सहयोगी शिवसेना ने महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाली अपनी ही सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जमाखोरी की सर्वाधिक घटना इसी राज्य में हो रही है।
130 फीसद बढ़ी आबादी
मंगलवार को पासवान ने दाल की बढ़ी कीमतों का कारण गिनाते हुए बेतहाशा बढ़ रही आबादी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बीते 40 साल में दाल उत्पादन में महज 18.13 फीसदी तो आबादी में 130 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई।
इस दौरान दालों की प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति उपलब्धता 61 ग्राम से घटकर 32 ग्राम हो गई। पासवान ने दाल की खेती का रकबा घटने और इस दौरान उत्पादन में 20 लाख मिट्रिक टन की कमी का भी रोना रोया। उन्होंने कहा कि मुश्किल यह है कि दाल उत्पादक अन्य देशों में भी इस बार पैदावार कम हुई।
आबादी के बाद कम उत्पादन के साथ जमाखोरी को बड़े कारण के रूप में गिनाते हुए पासवान ने बढ़ी कीमतों का ठीकरा राज्य सरकारों पर फोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने तत्परता दिखाते हुए 87000 टन दाल जब्त किया। हालांकि शिवसेना के सांसद ने इसी दौरान राज्य में सबसे अधिक जमाखोरी का आरोप लगाते हुए जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर डाली।