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मंत्रियों को खुश करने के लिए सरकारी कंपनियों का कारनामा

Sun, 22 Mar 2015 08:31 AM IST
Updated Sun, 22 Mar 2015 08:31 AM IST
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Psu spend their csr fund on minister's mp's area

कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड के दुरुपयोग को लेकर सर्वोच्च अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूपीए सरकार के समय इस्पात मंत्रालय ने इस फंड का बेजा इस्तेमाल किया था। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की गुहार लगाई है।

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डॉ. राजीव शर्मा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि आधा दर्जन से अधिक  सार्वजनिक कंपनियों (पीएसयू) ने सीएसआर फंड का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के गोंडा और बाराबंकी में लगाया।
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आरोप है कि इन पीएसयू द्वारा सीएसआर फंड का इस्तेमाल इन दो जिलों में इसलिए किया गया क्योंकि ये दोनों ही जिले तत्कालीन इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के संसदीय क्षेत्र में आते थे।
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सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका में लगाया आरोप

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याचिकाकर्ता के मुताबिक सेल, आरआईएनएल, एनएमडीसी, एमओआईएल, मैकोन, एमएसटीसी, एचएसीएल आदि पीएसयू ने डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (डीपीई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए सीएसआर गतिविधियों को अंजाम दिया।

याचिका में कहा गया है कि एनएमडीसी ने सीएसआर फंड का 97 फीसदी और एमओआईएल ने करीब 83 लाख रुपये गोंडा जिले में खर्च किए। जबकि इन दोनों कंपनियों का मुख्यालय नागपुर में है।

वहीं मैकोन ने वर्ष 2012-13 के दौरान करीब साढ़े 31 लाख रुपये गोंडा, बाराबंकी और बलरामपुर जिले में सीएसआर गतिविधियों पर खर्च किए। एमएसटीसी ने वर्ष 2011-12 के दौरान बाराबंकी में एक सामुदायिक केंद्र परियोजना पर सीएसआर फंड का 70 फीसदी खर्च किया।

कई पीएसयू ने बेनी प्रसाद वर्मा के क्षेत्र में लगाया पैसा

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वहीं वर्ष 2012-13 में एमएसटीसी ने सीएसआर फंड का 71 फीसदी इस्तेमाल गोंडा जिले में किया। याचिका में कहा गया है कि कोयला एवं स्टील की स्थायी समिति ने यह पाया था कि पीएसयू ने इन दोनों जिले में सीएसआर फंड का इस्तेमाल किया।

समिति ने इसे डीपीई दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया था। समिति ने यह भी पाया कि इन दोनों जिले में इन पीएसयू का कोई भी स्टील प्लांट नहीं है। समिति ने कहा मंत्रालय ने अपने मंत्री को खुश करने केलिए अपनी शक्ति का बेजा इस्तेमाल किया।

समिति ने इस मामले की जांच करने की सिफारिश की थी। याचिका में कहा गया है कि डीपीई दिशानिर्देशों के मुताबिक, पीएसयू अपने सीएसआर गतिविधियों को अपने प्लांट के आसपास ही अंजाम दे सकती है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा था लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। लिहाजा उन्हें सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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