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इसरो की एक और कामयाबी, अपने ‘जीपीएस’ के करीब पहुंचा भारत

Wed, 20 Jan 2016 11:43 PM IST
Updated Wed, 20 Jan 2016 11:43 PM IST
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PSLV-C31 launches IRNSS-1E, the fifth satellite of the IRNSS from Sriharikota.

अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) जैसी अपनी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए भारत ने बुधवार को पांचवें नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1ई का सफल प्रक्षेपण किया।

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रॉकेट लांचर पीएसएलवी-सी31 ने इस उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। इसरो की योजना मार्च तक इस सीरीज के सभी सातों उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की है।
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चेन्नई से करीब 110 किमी दूर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9.31 बजे पीएसएलवी-सी31 रॉकेट में विस्फोट हुआ और 19:20 मिनट बाद सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गया।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस सफलता पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है। पीएम ने इसरो के वैज्ञानिकों से फोन पर बात की और कहा कि वे लगातार हमें गर्व महसूस करवा रहे हैं।

उपग्रह को जियो सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में जैसे ही पहुंचाया जाएगा, आईआरएनएसएस-1ई के दो सोलर पैनल स्वत: सक्रिय हो जाएंगे।

इस सेटेलाइट की कक्षा बढ़ाने का काम कर्नाटक के हासन में स्थित मास्टर कंट्रोल रूम से किया जाएगा। इससे पहले अंतरिक्ष में छोड़े गए इस सीरीज के चार उपग्रह आईआरएनएसएस सिस्टम को शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन इस पांचवें सेटेलाइट के अलावा छोड़े जाने वाले दो अन्य सेटेलाइटों से यह सिस्टम ज्यादा सटीक और सक्षम हो सकेगा।

क्यों खास है यह उपग्रह

PSLV-C31 launches IRNSS-1E, the fifth satellite of the IRNSS from Sriharikota.

अपने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसरो के प्रमुख एएस किरण कुमार ने कहा कि नए साल में आज (बुधवार) पांचवें सेटेलाइट को लांच करने के साथ हम भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम को शुरू कर रहे हैं।

इस सेटेलाइट के साथ ही देश के अंदर 24 घंटे और सातों दिनों चीजों की सटीक मौजूदगी का पता लगाया जा सकेगा। आगे के परीक्षण के बारे में किरण कुमार ने कहा कि हमें लंबा सफर तय करना है। इसी साल अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट लांच करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि इसरो के वैज्ञानिक जीएसएलवी-मार्क 3 को लांच करना चाहते है, जो भारी उपग्रहों को जियो स्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर सकेगा।


आईआरएनएसएस-1ई उपग्रह इस सीरीज के इससे पहले छोड़े जा चुके चार अन्य उपग्रहों के समान है। इसमें नेविगेशन और रेंजिंग दो तरह के अंतरिक्ष उपकरण लगे हुए हैं। नेविगेशन उपकरण नेविगेशन सिग्लन को यूजर्स के पास प्रेषित करेगा और यह एल-5 बैंड और एस-बैंड को ऑपरेट करेगा। 

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