तेलंगाना: किसको फायदा और कौन झेलेगा नुकसान?
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आंध्र प्रदेश का विभाजन कर अलग तेलंगाना राज्य बनाए जाने के विरोध में विरोध प्रदर्शन जारी है। स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार किंगशुक नाग बता रहे हैं कि आखिर अलग तेलंगाना राज्य बनने से किसको ज्यादा फायदा मिलेगा और कौन नुकसान झेलने के लिए मजबूर होगा?
नाग कहते हैं कि तेलंगाना राज्य बनने से सीमांध्र इलाके में सिर्फ़ कांग्रेस का ही नुकसान होगा। राज्य में इस वक्त हो रही हिंसा या विरोध प्रदर्शन के निशाने पर कांग्रेस के नेता हैं क्योंकि यहां के लोगों को लग रहा है कि कांग्रेस की वजह से ही राज्य के बंटवारे का फैसला हुआ है।
तीन अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के सरकार के फ़ैसले को अनुमति दी थी।
इसी बीच वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हैदराबाद में शनिवार सुबह से अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
वहीं तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया एन चंद्रबाबू नायडू ने 'सीमांध्रा के लोगों को उनका हक़ दिलाने के लिए' सोमवार से दिल्ली में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने की घोषणा की है।
सीमांध्र की बिसात
ऐसे में एक अहम सवाल यह है कि तेलंगाना राज्य बनने के बाद सीमांध्र में जगनमोहन रेड्डी और एन चंद्रबाबू नायडू का क्या भविष्य हो सकता है?
नाग कहते हैं कि अलग तेलंगाना राज्य बनने से जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, दोनों को ही फायदा होगा। हालांकि वह मानते हैं कि जगनमोहन रेड्डी को सबसे ज़्यादा फायदा होगा।
जगन मोहन रेड्डी ने साफ कहा है कि राज्य को बांटने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जिम्मेदार हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य है राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना।
नाग के मुताबिक जगनमोहन रेड्डी सीमांध्र में बहुत लोकप्रिय हो गए हैं और उनके लिए राज्य का बंटवारा एक राजनीतिक वरदान साबित हो रहा है। ऐसे में उन्हें चुनाव होने पर इसका सीमांध्र में भरपूर फायदा मिलेगा।
नाग के मुताबिक तेलंगाना मुद्दे का फायदा उठाने में चंद्रबाबू नायडू जगन से पीछे नजर आते हैं क्योंकि उन्होंने काफी दिनों तक तेलंगाना बनाए जाने का विरोध नहीं किया था।
"वो बहुत दिनों तक दो नावों की सवारी करते रहे। एक तरफ वो संयुक्त आंध्र की वकालत करते तो दूसरी तरफ कहते रहे कि तेलंगाना भी बनना चाहिए। ऐसे में लोगों को उन पर भरोसा नहीं हो पाया और इसे दोहरी राजनीति के तौर पर देखा गया।"
वैसे चंद्रबाबू भाजपा के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल नाग का मानना है कि इस पूरे इलाके में सबसे ज्यादा नुक़सान कांग्रेस को होता दिख रहा है। उसके नेता या तो जगनमोहन का दामन थाम रहे हैं या फिर टीडीपी की तरफ जा रहे हैं।
नफा नुकसान
नाग कहते हैं, "तेलंगाना के समर्थकों को लगता है कि अलग राज्य बनने से चहुंमुखी विकास होगा लेकिन ऐसा नहीं है कि उनकी सोच के मुताबिक़ ही चीज़ें हों। नुकसान यही हो सकता है कि जब एक बड़ा प्रदेश टूट जाएगा तो राज्य में आने वाले निवेश पर भी असर पड़ेगा।"
यह संदेह जताया जा रहा है कि अलग राज्य बनने पर आंध्र प्रदेश के लोग यहां निवेश करने के लिए नहीं आएंगे ऐसे में इसे नुकसान होगा। हालांकि राज्य के नेताओं को लगता है कि आंध्र प्रदेश अगर निवेश नहीं भी करेगा तो भी देश के दूसरे हिस्सों से आकर लोग निवेश करेंगे।
अलग तेलंगाना राज्य सीमांध्र के लिए कितना फायदेमंद और नुकसानदायक साबित हो सकता है?
इस पर नाग कहते हैं, "यह एक तरह से भावनात्मक क्षति है। हालांकि कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा। मैं समझता हूं कि सीमांध्र का इलाक़ा जल्दी ही विकसित हो जाएगा। सीमांध्र के पास एक बड़ा तटीय क्षेत्र है जो विशाखापट्टनम से लेकर नैल्लोर तक है। इस क्षेत्र में कई बंदरगाह, विशेष आर्थिक क्षेत्र और रिफाइनरीज हैं। इसी क्षेत्र में नौसैनिक ठिकाने भी हैं ऐसे में नुकसान की कोई संभावना नहीं है।"
वहां पेट्रोकेमिकल क्षेत्र भी बन रहा है ऐसे में वहां काफी निवेश आने की उम्मीद है। वह मानते हैं कि लंबी अवधि में सीमांध्र का विकास बेहद तेज़ी से होगा और इसके मुक़ाबले तेलंगाना के विकास की रफ़्तार कम होगी
कैसा है माहौल
नाग का कहना है कि इस वक्त राज्य में माहौल अच्छा नहीं है क्योंकि सबकुछ ठप पड़ा हुआ है। कुछ जगहों से हिंसा की ख़बरें भी आ रही हैं। आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र विजयनगरम में स्थिति नाज़ुक है।
हिंसा की ज्यादातर ख़बरें विजयनगरम ज़िले से आ रही हैं। आंध्रप्रदेश के प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख बोसा सत्यनारायण का ताल्लुक भी विजयनगरम से है।
लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रुक गई है। स्कूल, कॉलेज और व्यापारिक प्रतिष्ठान सब बंद हैं।
ऐसी खबरें आ रही हैं कि विजयवाड़ा के ताप बिजलीघर की छह इकाइयों में उत्पादन ठप पड़ गया है।
नाग कहते हैं, "अभी तक तो कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ा है। लेकिन आने वाले दिनों में इसका ज़्यादा असर पड़ सकता है। फिलहाल राज्य में कई दूसरे पावर स्टेशन भी हैं और कई जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं जिनसे काम चल रहा है। वैसे आंध्रप्रदेश में काफी समय से बिजली की दिक़्कत भी है।"
उनका कहना है कि राज्य में हड़ताल की जितनी भी घटनाएं हो रही हैं उनमें मज़दूर, सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारी इस विरोध प्रदर्शन में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। इन्होंने मिलकर ज्वाइंट एक्शन कमिटी बनाई है। ऐसे में सरकारी सेवाओं पर सबसे पहले असर दिख रहा है और वे ठप हो रही हैं।
(बीबीसी संवाददाता वर्तिका तोमर से बातचीत पर आधारित)