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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ी, विपक्ष ने सरकार को घेरा

Thu, 17 Dec 2015 05:26 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 17 Dec 2015 05:26 AM IST
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Protest in Parliament over excise duty on Petrol and Diesel

पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के ताजा फैसले पर विपक्ष ने राज्यसभा में सरकार की जमकर खिंचाई की। इस पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सफाई देते हुए कहा है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से वसूली गई राशि विकास योजनाओं पर खर्च हुई है और वैट बढ़ाने से राज्यों को फायदा हुआ है।

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पूरक प्रस्ताव पर विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर महंगाई बढ़ाने के आरोप लगाए। वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल के दाम बीस बार और डीजल के दाम 16 बार घटाए गए हैं। जब दाम घटता है तो राज्य वैट बढ़ा देते हैं। असम और मिजोरम को छोड़कर सभी राज्यों ने वैट बढ़ाया है।
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इस तरह राज्यों को फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि बढ़ी कीमतों से जो राशि मिली है वह नेशनल हाइवे और ग्रामीण सड़कों जैसी विकास योजनाओं में लगाई गई। इसके अलावा तेल कंपनियों को हुए घाटे को रिकवर भी किया गया है। सरकार बजट कटौती किए बगैर राजकोषीय घाटे को रिकवर कर लेगी। सदस्य डेरेक ओब्राइन ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने वैट नहीं बढ़ाया। इस पर जेटली ने आपत्ति जताई।
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विपक्ष का आरोप जनता नहीं मुनाफे पर सरकार का ध्यान

Protest in Parliament over excise duty on Petrol and Diesel

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 35 डॉलर प्रति बैरल है लेकिन सरकार कीमत घटाने के बजाय इसे बढ़ा रही है। उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल रही है और सरकार मुनाफा कमा रही है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या यही अच्छे दिन हैं। बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि सरकार दाम घटाए। सरकार कहती है कि योजनाओं पर पैसे लगाए। आधी योजनाएं बंद कर दी गई हैं तो किन योजनाओं पर पैसे खर्च हुए। सपा के राम गोपाल यादव ने कहा कि कच्चे तेल का भाव अभी उतना है जितना दस साल पहले था।

इसलिए सरकार कीमतों में प्रति लीटर दस रुपये की कटौती करे। जदयू के शरद यादव ने कहा कि आम लोग महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। ऐसे में एक्साइज ड्यूटी को नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

तेल की कीमत का फार्मूला (बीएस 4 के लिए दिल्ली आधारित)

Protest in Parliament over excise duty on Petrol and Diesel

इस फार्मूले के तहत हम तक पहुंचता है डीजल और पेट्रोल आइए समझें।

23.77 रुपये में रिफायनरियों को मिलता है कच्चा तेल
3.29 रुपये प्रति लीटर होता है डीलर का मार्जिन
19.06 रुपये प्रति लीटर लगता है केंद्रीय उत्पाद शुल्क
2.26 रुपये प्रति लीटर होती है अन्य प्रकार की लागत
12.10 रुपये प्रति लीटर बनता है वैट टैक्स
60.48 रुपये प्रति लीटर है पेट्रोल की खुदरा कीमत

तेल पर अंतरराष्ट्रीय सियासत

Protest in Parliament over excise duty on Petrol and Diesel

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारों के बीच उठा-पठक के कारण बाजार में कच्चे तेल के उत्पादन पर पड़ रहा है असर।

लाभ कमाने के लिए अमेरिका व सऊदी अरब में समन्वय की कमी।
सऊदी अरब चाहता है कि रूस-ईरान को चोट देकर कीमत कम रखे।
बाजारों को स्थिर करने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं ओपेक देश।
विएना बैठक में ओपेक देशों का उत्पादन में कटौती से इंकार करना।
ईरान, वेनेजुएला, इक्वाडोर, अल्जीरिया का उत्पादन में कमी पर जोर।
सऊदी अरब, यूएई व खाड़ी देश नहीं चाहते उत्पादन में कमी लाना।
परमाणु समझौते के बाद इराक ने ईरान से ज्यादा तेल बाजार में भेजा।

इसलिए हो रही है तेल में गिरावट

Protest in Parliament over excise duty on Petrol and Diesel

इन कारणों के कारण गिर रहा क्रूड

पिछले छ: साल से अमेरिका का घरेलू तेल उत्पादन दोगुना हुआ।
अमेरिका से आयात गिरा, तेल उत्पादकों में गलाकाट स्पर्धा शुरू।
कनाडा-इराक में तेल उत्पादन व निर्यात हर साल बढ़ रहा है।
रूस का घरेलू तेल उत्पादन भी बढ़ गया है, निर्भरता कम हुई।
यूरोप और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ना।
ईंधन खर्च मामले में गाड़ियां किफायती हुईं, तेल की मांग घटी।

इन हालातों में बढ़ सकते हैं मूल्य

यदि ओपेक देश कच्चे तेल की उत्पादन में कमी कर दें।
यदि नए वाहनों में औसत कम होने से तेल की खपत बढ़े।
यदि बाजार में इलेक्ट्रॉनिक वाहन आने से रोके जाएं।
यदि वैकल्पिक ऊर्जा शोध के परिणाम नकारात्मक हों।
फिलहाल ऐसा असंभव है, अत: मूल्य वृद्धि मुमकिन नहीं।

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