मंदिर तोड़ने के विरोध में सड़क पर उतरा संघ
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मेट्रो और यातायात सुगम करने के नाम पर प्रशासन द्वारा तोड़े गए 65 मंदिरों के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सहित हिंदूवादी संगठनों ने बृहस्पतिवार को जयपुर में चक्का जाम किया। आंदोलन की वजह से जयपुर दो घंटे के लिए थमा रहा।
राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ सुबह 9 से 11 बजे तक के चक्का जाम से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हुई। चक्का जाम के बाद मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है।
समिति के मुताबिक सात दिन में यदि करीब 250 साल पुराने रोजगारेश्वर मंदिर को उसकी पुरानी जगह पर स्थापित करने का निर्णय नहीं लिया गया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
आम जन से मांगी माफी
समिति के कार्यकर्ता सुबह नौ बजे से पहले जयपुर के करीब 75 चौराहों पर
एकत्रित हुए और चक्का जाम किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी हिंदूवादी
संगठनों का पूरा साथ दिया।
कार्यकर्ताओं ने हटाए गए रोजगारेश्वर मंदिर पर
पुष्प अर्पित किए, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुतला जलाया।
समिति
के संयोजक बद्री नारायण चौधरी ने आम जन से परेशानियों को लेकर क्षमा मांगी
और कहा कि समिति ने राजधानी में चक्का जाम करके सरकार तक अपनी बात पहुंचा
दी है।
विहिप ने की राजे की आलोचना
जयपुर में मंदिरों को ढहाए जाने को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की आलोचना की है। विहिप ने कहा कि हिंदू पूजा स्थलों को निशाना बनाकर वसुंधरा छद्म धर्म निरपेक्षता का दिखावा कर रही हैं।
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि मंदिरों को गिराने के विरोध में सड़क पर उतरने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं था। विहिप ने यह भी कहा कि उसने राम मंदिर के अपने प्रमुख मुद्दे से अब भी किनारा नहीं किया है।