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वेश्यावृति को वैध करने पर हो रहा है विचार

Thu, 30 Oct 2014 01:46 PM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 01:46 PM IST
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prostitution in India: legal or illegal

देश में वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पैनल में आठ नवंबर को चर्चा होगी। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) की प्रमुख ललिता कुमारमंगलम ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि पैनल की ओर से 8 नवंबर को इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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सेक्स वर्कर्स के पुनर्वास के लिए 2010 में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पैनल का गठन किया था। 24 अगस्त 2011 के अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने पैनल की बैठकों में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी हिस्सा लेने का निर्देश दिया था।
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इस पैनल को अनैतिक मानव तस्करी (रोकथाम) अधिनियम 1956 (आईटीपीए) में कुछ संशोधनों का सुझाव देना है, ताकि देश में रहने वाले सेक्स वर्कर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीवन-यापन कर सकें।

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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जाहिर की चिंता

prostitution in India: legal or illegal

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित पैनल आईटीपीए के मौजूदा प्रावधानों, कमियों, कानूनों के क्रियान्वयन और सेक्स वर्कर्स के जीवन पर इस क्रियान्वयन के पड़ने वाले प्रभावों पर विचार करेगा।

वहीं दूसरी ओर कुमारमंगलम ने मीडिया की उन खबरों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि वह वेश्यावृत्ति को वैध बनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखने की योजना बना रही हैं।

हालांकि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिला आयोग के प्रस्ताव पर चिंता और असंतोष जाहिर किया है। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा कि सेक्स की खरीद-फरोख्त को आपराधिक करार देने के बजाय हम सेक्स वर्कर्स का शोषण करने वालों को ही ज्यादा ताकतवर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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