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एक सीढ़ी चढ़ा प्रमोशन में आरक्षण बिल

Mon, 17 Dec 2012 10:10 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 17 Dec 2012 10:10 PM IST
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reservation in promotion bill pass in rajya sabha
तमाम उतार चढ़ाव के बाद आखिरकार सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन बिल सोमवार को राज्यसभा में पारित हो गया। संविधान (117वां संशोधन) विधेयक 2012 के पक्ष में भारी भरकम 206 वोट पड़े तो विरोध में सिर्फ दस वोट ही डाले गए।
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प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने बिल को पारित कराने में पूरा सहयोग दिया तो सपा का कड़ा विरोध भी काम नहीं आया। विधेयक पारित होने के बाद मायावती ने सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास जाकर उनका शुक्रिया अदा किया। वहीं, सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि कुछ लोगों को खुश करने के लिए सरकार ऐसा कर रही है। मगर यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा और वहां फिर यह कानून रद्द होगा।
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लगभग दो दिन की मैराथन बहस के बाद राज्यसभा में बिल अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों ने बड़ी संख्या में सदन में मौजूद होकर बिल को पास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपा सदस्यों ने बिल के विरोध में वोट किया तो शिवसेना ने सदन से गैर हाजिर रहकर अपना विरोध दर्ज कराया।
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बिल के पारित होने के बाद अब बिल लोकसभा में पारित होने के लिए जाएगा। लोकसभा में सरकार के लिए बिल को पारित कराना बड़ी चुनौती है क्योंकि वहां सपा सदस्यों की संख्या राज्यसभा के मुकाबले ज्यादा है। कार्मिक विभाग के राज्यमंत्री नारायण सामी ने कहा कि यह बिल दलित और पिछड़े वर्ग को समानता का अधिकार देगा। वहीं उन्होंने सामान्य वर्ग के लोगों को भी भरोसा दिया कि उनके अधिकार क्षेत्र में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

बिल के अनुच्छेद 335 के प्रमोशन संबंधी भाजपा के संशोधन को सरकार ने मान लिया है। इसके मुताबिक कैरियर रिकॉर्ड और योग्यता प्रमोशन का आधार बनेगा। भाजपा का कहना है कि इस संशोधन के जरिए अब ऐसा नहीं होगा कि अयोग्य पद को प्रमोशन मिलेगा। अरुण जेटली ने कहा कि यह संशोधन प्रशासन में दक्षता से निपटेगा।

वहीं बिल पर सामी के जवाब के बाद जेटली ने कहा कि जिनको 1995 से पहले प्रमोशन मिला है। सरकार को उनके हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका प्रमोशन डिमोशन में नहीं बदला जाना चाहिए। इसके जवाब में सामी ने कहा कि वह इस संबंध में सभी राज्यों से अनुरोध करेंगे कि इस बात का ध्यान रखा जाए।

वहीं, रामगोपाल ने कहा कि यह बिल समाज को दो भागों में बांट देगा। प्रमोशन में परिस्थितिजन्य वरिष्ठता गलत है और इससे लोगों में द्वेष फैलेगा। बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया कि जब वह सरकार में थे तो कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण के पक्ष में सरकार ने पूरा ब्योरा और सर्वेक्षण दिया था मगर कोर्ट ने पुराने निर्णयों को आधार बनाकर उनकी बात खारिज कर दी थी।


सपा ने की बिल टलवाने की कोशिश
बिल का विरोध कर रही सपा ने अंतिम क्षणों तक इसे टलवाने की कोशिश की। उसने कहा कि बिल को सघन विचार विमर्श के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए। हालांकि उसका यह आग्रह खारिज कर दिया गया।


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