फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   promotion policy differences between army and ministry of defence

प्रमोशन नीति पर सेना, रक्षा मंत्रालय के बीच मतभेद

Fri, 01 Feb 2013 09:29 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Fri, 01 Feb 2013 09:29 PM IST
विज्ञापन
promotion policy differences between army and ministry of defence

सेना की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल और मेजर जनरल रैंक के प्रमोशन के लिए प्रस्तावित नई नीति से रक्षा मंत्रालय सहमत नहीं है। मंत्रालय और सेना के बीच इस मसले पर मतभेद हैं। रक्षा मंत्रालय ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सेना ने सरकार की मंजूरी के बिना प्रमोशन का नया फॉर्मूला तैयार किया है। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने भी सेना की ओर से पेश की गई नीति को अपनी राय में समानता के अधिकार के खिलाफ बताया है।

विज्ञापन


रक्षा मंत्रालय की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल एसएस ठकराल को दिए गए प्रमोशन को अवैध करार दिया गया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से ठकराल दो पद नीचे बिग्रेडियर रैंक पर आ गए। मंत्रालय के मुताबिक अजयवीर सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर सेना ने अतिरिक्त पद सृजित किए थे।
विज्ञापन


2011 से पहले प्रमोशन के लिए रिक्त स्थानों की गणना मौजूदा वर्ष के साथ-साथ अगले दो साल की रिक्तता को जोड़कर की जाती थी। इस तरह तीन साल के रिक्त पदों के बैच की कुल संख्या तय की जाती थी। 1976 और 1977 बैच के लिए यही प्रक्रिया अपनाई गई थी। मगर सेना ने 1978 बैच के लिए तीन साल के बजाए चार साल की कुल संख्या की गणना की।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेना की दलील थी कि ब्रिगेडियर और मेजर जनरल की नियुक्ति की उम्र कम किए जाने के कारण ऐसा किया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सेना में प्रमोशन का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में रक्षा मंत्रालय ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक का आग्रह किया है।


हाईकोर्ट ने 1974 बैच के सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल ठकराल को 2009 और 2011 में मिले प्रमोशन को खारिज करते हुए कहा था कि स्टाफ चयन बोर्ड ने अपने नियमों के विपरीत पदोन्नति दी। स्टाफ चयन बोर्ड की प्रक्रिया और निर्णयों के रद्द होने से उस दौरान पदोन्नति पाने वाले अन्य अधिकारी भी प्रभावित हुए हैं। हाईकोर्ट ने ठकराल को 12 अगस्त, 09 और 18 अगस्त, 2011 को मिले प्रमोशन को खारिज कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed