फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   profile Phoolan devi murderer sher singh rana

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लेने जेल से भागा था फूलन का हत्यारा

Sat, 09 Aug 2014 12:25 PM IST
Updated Sat, 09 Aug 2014 12:25 PM IST
विज्ञापन
profile Phoolan devi murderer sher singh rana

दस्यु से सांसद बनी फूलन देवी की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए शमशेर सिंह राणा का जन्म 17 मई 1976 को उत्तराखंड के रुड़की में हुआ था। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली स्थित सरकारी आवास के सामने फूलन देवी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई।

विज्ञापन


इस घटना के दो दिन बाद आरोपी शेर सिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और हत्या में शामिल होने की बाद स्वीकार कर ली। इस हत्या को अंजाम देने का जो कारण सामने आया वह चौंकाने वाला था।
विज्ञापन

फिल्मी अंदाज में तिहाड़ से फरार हुआ

profile Phoolan devi murderer sher singh rana

पुलिस के अनुसार राणा ने बहमई हत्याकांड में मारे गए 22 ठाकुरों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन देवी की हत्या की। हालांकि बाद में राणा अपने बयान से पलट गया। लगभग तीन साल बाद 17 फरवरी 2004 को राणा फिल्मी अंदाज में तिहाड़ जेल से फरार हो गया।

लेकिन 17 मई 2006 को राणा को एक बार फिर कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तार कर लिया गया। राणा ने उत्तर प्रदेश के जेवर से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गया। वह पांचवें नंबर पर आया था।

जेल से भागकर अफगानिस्तान गया

profile Phoolan devi murderer sher singh rana

राणा की तमन्ना है कि उसके ऊपर फिल्म बने। राणा ने जेल में रहकर डायरी लिखी है। उसे फिल्म निर्माता की तलाश है। अपने फरारी के दिनों के बारे में राणा ने जो खुलासा किया वह आश्चर्यजनक था।

राणा ने दावा किया कि अफगानिस्तान के गजनी इलाके में पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों के अपमान की जानकारी मिलने को लेकर वह बेहद दुखी था और उसने उसे वापस लाने की ठानी। फरारी के बाद उसने सबसे पहले रांची से फर्जी पासपोर्ट बनवाया।

विज्ञापन

13 साल में जाकर हुआ फैसला

profile Phoolan devi murderer sher singh rana

नेपाल, बांग्लादेश, दुबई होते हुए अफगानिस्तान पहुंचा। जान जोखिम में डालते 2005 में वह अस्थियां लेकर भारत आया। राणा ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो भी बनाई। ताकि वह अपनी बात को प्रमाणित कर सके।

बाद में राणा ने अपनी मां की मदद से गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया, जहां पर उनकी अस्थियां रखी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed