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मोदी के नए सुरक्षा सलाहकार की चौंकाने वाली बातें

Sun, 25 May 2014 08:12 AM IST
Updated Sun, 25 May 2014 08:12 AM IST
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Profile of ex ib chief ajit doval

केरल कॉडर के 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अजीत डोवल एनडीए सरकार के दौरान आईबी के निदेशक नियुक्त हुए थे और 2005 तक इस पद पर रहे।

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इस समय वह गैर सरकारी संस्था विवेकानंद केंद्र की शाखा विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के निदेशक हैं। वह कर्नाटक सरकार के सुरक्षा सलाहकार भी रह चुके हैं।

उन्हें बेहद तेज तर्रार अधिकारी माना जाता है और आम तौर पर सैन्य बलों को वीरता के लिया दिया जाने वाला उच्च सम्मान कीर्ति चक्र 1988 में उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया गया। भारतीय पुलिस पदक पाने वाले वह सबसे युवा अधिकारी थे।

कई मोर्चों पर संभाली कमान

Profile of ex ib chief ajit doval

विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी नवाजा जा चुका है। मिजोरम के उग्रवादी संगठन मिजो नेशनल फ्रंट को केंद्र सरकार के साथ समझौते के लिए मजबूर करने में डोवल की अहम भूमिका थी।

इसके लिए वह लंबे समय तक बर्मा और चीनी क्षेत्र में मिजो नेशनल आर्मी के बीच भी रहे और मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष लाल डेंगा ने खुद कहा था कि डोवल ने उनके सात में से छह कमांडरों को तोड़ लिया था।

पंजाब में उन्हें खालिस्तानी आतंकवादियों की कैद से रुमानिया के राजनयिक रादू को रिहा करवाने में कामयाबी मिली।

स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों को निकलवाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान डोवल हर‌म‌िंदर साहब के भीतर थे और उनकी मदद से अनेक वांछित आतंकवादियों को बाहर निकाला गया।

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सबसे कम उम्र के पुल‌िस पदक व‌िजेता

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1992 में पंजाब विधानसभा संपन्न सफलता पूर्वक संपन्न करवाने में डोवल की अहम भूमिका थी। बताया जाता है कि दाऊद इब्राहीम को घेरने की इनकी रणनीति एक समय बेहद कामयाब मानी जाती रही है।

आतंकवाद विरोधी आपेरशन्स, आईएसआई और पाकिस्तान के मामलों के वह विशेषज्ञ हैं। पाकिस्तान में वह करीब छह साल तक रहे।

जम्मू कश्मीर में कूका पारे जैसे उग्रवादियों को आईएसआई द्वारा भेजे गए आतंकवादियों के खिलाफ खड़ा करने का उनका आपरेशन कामयाब रहा। 1996 में जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों को शांति पूर्वक सपन्न करवाने में भी डोवल ने खासी मेहनत की।

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