पढ़िए, अमित शाह के बारे में 5 नई बातें
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अमित शाह ने जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमान संभाली, लोकसभा चुनावों में लगभग 10 महीने बाकी थे और प्रदेश में भाजपा की मात्र 10 लोकसभा सीटें ही थी। संगठन कागजों पर था लेकिन कार्यकर्ता नदारद। नेता भी पार्टी का झंडा उठाने के बजाय गुटबाजी का परचम लहराते अपनी-अपनी मांद में हुंकारते रहते।
अमित शाह नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का लक्ष्य लेकर उत्तर प्रदेश आए थे। प्रदेश में भाजपा की हालत को देखते हुए ये कठिन चुनौती मानी जा रही थी। लेकिन 16 मई को लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई, तो हर तरह की चुनौतियां हवा हो गई। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें हासिल की। प्रदेश में भाजपा की ये अब तक की सबसे बड़ी जीत थी।
उस करिश्माई जीत के शिल्पकार अमित शाह को आज भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पढ़िए, अमित शाह के बारे में कुछ खास बातें-
1982 में हुई मोदी की शाह से मुलाकात
पेशे से स्टॉक ब्रोकर और वैचारिक स्तर पर आरएसएस के झंडाबरदार अमित शाह ने 1997 में गुजरात की सरखेज विधानसभा सीट से राजनीति में धमाकेदार शुरुआत की थी।
सरखेज के जीत ने उन्हें गुजरात में युवा और तेजतर्रार नेता के रूप में स्थापित किया। उस जीत के बाद वे भाजपा में लगातार सीढ़ियां चढ़ते गए। 1964 में गुजरात के एक व्यापारी के घर में पैदा हुए शाह बहुत कम उम्र में ही संघ से जुड़ गए थे।
नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात 1982 में हुई थी। शाह उन दिनों अहमदाबाद में कॉलेज में पढ़ते थे। मोदी उन दिनों संघ के प्रचारक थे।
1997 में शाह ने जीता पहला चुनाव
शाह उन दिनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे। 1986 में वे भाजपा में शामिल हो गए। 1997 में सरखेज विधानसभा उपचुनाव का टिकट पाने से पहले उन्होंने पार्टी में कई अहम पदों पर काम किया। 1987 में सामन्य कार्यकर्ता के रूप में पार्टी ने उन्हें भाजयुमो में भेज दिया था।
बाद में वे भाजयुमो में वार्ड सचिव, तालुका सचिव, राज्य सचिव, उपाध्यक्ष और महासचिव तक बने। 1997 में उन्हें सरखेज विधानसभा सीट से टिकट दिया गया।
2012 में नारनुपरा सीट पर विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने तीन बार सरखेज सीट का प्रतिनिधित्व किया। 2002 के गुजरात दंगों के बाद बाद सरखेज में बंपर वोटों से जीत हासिल की थी।
मोदी ने उसी वर्ष अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन शाह ने डेढ़ लाखा वोटों से जीत हासिल कर उनकी जीत फीकी कर दी थी। 2007 विधानसभा चुनावों में शाह सरखेज से और बड़े अंतर से जीते थे।
मोदी के साथ शाह की दोस्ती
1982 में पहली मुलाकात के बाद मोदी और शाह की दोस्ती लगातार गहरी होती गई। 1995 में केशुभाई के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी और शाह की जोड़ी ने गुजरात में कांग्रेस को खत्म करने के लिए हर संभव की।
उन्होंने भाजपा के भीतर अपने विरोधियों को अलग-थलग किया और कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया। दोनों की जोड़ी भाजपा के भीतर लगातार मजबूत होती गई और भाजपा राज्य के भीतर।
केशुभाई ने उन्हीं दिनों मोदी की सिफारिश पर शाह को गुजरात स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया।
कार्यकर्ताओं के कारीब हैं अमित शाह
मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद शाह और अधिक मजबूती से उभरे। मोदी ने 12 साल तक प्रदेश की कमान संभाली और शाह के पास इन सालों में लगभग 10 विभाग रहे।
हालांकि पॉवरफुल होने के बाद भी उन्होंने खुद को लो प्रोफाइल ही रखा है।
भाजपा के भीतर उन्हें चाणक्य कहा जाता है। अमित शाह के बारे में मशहूर है कि वे कार्यकर्ताओं का एक भी फोन मिस नहीं करते। कार्यकर्ताओं के साथ हर मुद्दे पर लंबी बात करना उनकी पुरानी आदत है।