डिब्बा बंद मीट से कैंसर का खतरा: डब्लूएचओ
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अगर आप नॉनवेज खाने को शौकीन हैं और उसमें ताजे मीट के अलावा आप डिब्बा बंद मीट खाते हैं तो सावधान हो जाएं। जिस डिब्बे बंद मीट की मांग सबसे अधिक रहती है, उसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) कैंसर का कारक बता रही है।
डब्लूएचओ की इस रिपोर्ट के बाद देश में गोमांस बिक्री का विरोध करने वाले लोगों को अपनी बात रखने के लिए अचानक समर्थन मिल गया है। माना जा रहा है कि सोमवार को डब्लूएचओ इस पर औपचारिक घोषणा कर सकती है।
ऐसा होने पर यह भी सिगरेट, शराब और एसबेस्टस वाली लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा।
दस देश देशों के वैज्ञानिकों ने उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर प्रोसेस्ड मीट के संबंध में रिपोर्ट तैयार की है। इसमें उनकी राय बनी है की डिब्बा बंद या प्रोसेस्ड मीट से मनुष्य को कैंसर का खतरा है। जिसमें कैंसर के पांच सबसे बड़े संभावित कारक हैं।
डब्लूएचओ की रिपोर्ट आने के बाद, जारी नए दिशा निर्देश में मीट के डिब्बों पर चेतावनी के लेबल लगाए जाएंगे।
ब्रिटेन की वेबसाइट डेली मेल का कहना है कि रिपोर्ट के सबूत बताते हैं कि डिब्बा बंद या प्रोसेस्ड मीट खाने से आंत के कैंसर होता है। वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के मुताबिक, डिब्बा बंद मीट की अत्यधिक मात्रा लेने से आंत कैंसर का खतरा है।
दिल के लिए खतरनाक है डिब्बा बंद मीट?
अमरीका में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि रेड मीट में पाया जाने वाला एक रसायन दिल के लिए खतरनाक होता है।
'नेचर मेडिसिन' नाम की विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक रेड मीट में पाया जाने वाला क्रेनिटाइन नाम के रसायन को बैक्टिरिया पेट में छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं। इसके बाद होने वाली रासायनिक क्रिया की वजह से शरीर में कॉलस्ट्रॉल के स्तर में बेहद इजाफा होता है जिससे हृदय रोग की आशंका भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि क्रेनिटाइन की खुराक लेने वालों के लिए यह एक खतरनाक संकेत हो सकता है। शोधकर्ता डॉक्टर स्टैनिली हेजन कहते हैं, 'कोलेस्ट्राल और रेड मीट का संतृप्त वसा ही इसका प्रमुख कारक नहीं है, यहां कुछ और भी है जो हृदय रोग का जोखिम बढ़ाने में योगदान देता है।'
चूहों और इंसानों पर हुए प्रयोगों में पता चला कि पेट में मौजूद यह बैक्टिरिया क्रेनिटाइन को खा जाता है। इससे क्रेनिटाइन गैस में बदल जाता है फिर यह लीवर में जाकर 'टामो' नाम के एक रसायन में परिवर्तित हो जाता है।
इस अध्ययन से यह पता चला कि 'टामो' का संबंध रक्त वाहिकाओं में वसा के जमने से था। इससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ने के साथ-साथ मौत भी हो सकती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के डॉक्टर हेजन कहते हैं,'टामो को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। हो सकता है कि यह बेकार हो। लेकिन यह कोलेस्ट्राल मेटाबॉलिजम को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। यह कोलेस्ट्राल के स्तर को बढ़ा सकता है।'