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कोर्ट ने 2007 में खत्म कर दी थी कार्यवाही

Mon, 28 Jan 2013 10:13 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Jan 2013 10:13 PM IST
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proceedings court was abolished in 2007

ताज कॉरिडोर मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके सहयोगी नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस मामले में आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और धारा 471 (फर्जी दस्तावेज को सही दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करना) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की तमाम धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

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गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्यपाल की मंजूरी के अभाव में मायावती और सिद्दीकी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने संबंधी विशेष अदालत के जून, 07  के आदेश को सही ठहराया था। मुख्यमंत्री के रूप में मायावती ने 2002 में ताजमहल के सौंदर्यीकरण के लिए इसके आसपास ताज कॉरिडोर परियोजना शुरू की थी। इसके बाद शीर्ष अदालत में मामला आने पर सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मायावती पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देने के राज्यपाल के निर्णय और मायावती व नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने के विशेष अदालत के फैसले को सीबीआई ने चुनौती नहीं दी है।
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वहीं, मायावती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि बसपा सुप्रीमो के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग के इस मुद्दे पर चौथी मर्तबा याचिका दायर की गई है। शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर अपना निर्णय पहले दे चुकी है। लिहाजा इस पर फिर से सुनवाई की जरूरत नहीं है। लेकिन पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करके इस मुद्दे पर सुनवाई का निर्णय लिया।

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