प्रियंका गांधी पर कांग्रेस को देनी पड़ी सफाई
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कांग्रेस में प्रियंका गांधी की भूमिका को लेकर पार्टी को लोकसभा चुनाव के दौरान भी सफाई देनी पड़ रही है।
पार्टी ने साफ कहा है कि प्रियंका ने खुद रायबरेली और अमेठी संसदीय सीटों तक खुद को सीमित रखने का फैसला किया है और दूसरे संसदीय क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार करने के बारे में उन्होंने सोचा तक नहीं है।
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी की ओर से प्रियंका के संबंध में दिए बयान के बाद कांग्रेस को सफाई देनी पड़ी है। द्विवेदी ने कहा था कि राजनीति में प्रियंका गांधी की रुचि बहुत कम आयु से थी। राजनीतिक घटनाओं और राजनीतिक भाषा की गहराई को वह आरंभ से ही समझना चाहती थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में 1990 में राजीव गांधी ने उनसे कहा था।
जनार्दन के बयान से उठा विवाद
द्विवेदी के इस बयान से राजनीतिक हलकों में यह अटकलें शुरू हो गई कि मौजूदा संकट की घड़ी में कांग्रेस को उबारने के लिए प्रियंका सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती है।
हालांकि कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने साफ किया कि प्रियंका रायबरेली और अमेठी में एक बेटी और बहन के नाते सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रही हैं और निभाती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी यही बात कई बार दोहरा चुकी है। सुरजेवाला ने कहा कि वह अपने भाई और मां दोनों के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक ताकत का एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों से बाहर कहीं भी राजनीतिक गतिविधि नहीं की है। ये उनका खुद का निर्णय है।
कांग्रेस ने किया जनार्दन के बयान से किनारा
प्रियंका गांधी की सक्रिय भूमिका को लेकर द्विवेदी के बयान पर पार्टी ने कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उनकी टिप्पणी का आखिर क्या अर्थ है, इसका जवाब द्विवेदी ही दें तो बेहतर होगा।
प्रियंका रायबरेली और अमेठी से बाहर सक्रिय भूमिका नहीं निभाने के कांग्रेस के स्टैंड को लेकर अमर उजाला लगातार जानकारी देता रहा है।
दरअसल, प्रियंका गांधी की सक्रियता को लेकर पार्टी के अंदर एक राय यह है कि इससे राहुल गांधी के कद पर असर पड़ेगा। पार्टी 2014 के चुनाव में राहुल का चेहरा सामने लाकर आगे बढ़ रही है। पार्टी के कई नेता मानते है कि अगर प्रियंका की भूमिका बढ़ती है तो ऐसे में राहुल की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।