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पर्दे के पीछे प्रियंका ने निभाई अहम भूमिका
जयपुर/समीर शर्मा
Updated Mon, 21 Jan 2013 08:05 PM IST
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गुलाबी शहर में कांग्रेस के चिंतन शिविर के आखिरी दिन प्रियंका वाड्रा एक अहम रोल अदा कर गईं। राहुल गांधी के नजदीकी राजनीतिक सलाहकारों में गिनी जाने वाली प्रियंका ने नई जिम्मेदारी मिलने पर राहुल का पहला भाषण ऐसे तैयार करवाया कि राहुल की चारों ओर वाहवाही हो रही है। प्रियंका रविवार सुबह जयपुर हवाई अड्डे से सीधे राजमहल होटल के उस कमरे में पहुंचीं, जहां राहुल ठहरे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने राहुल को बधाई दी और उनके साथ करीब पौन घंटे तक भाषण तैयार करने में मदद की।
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जब राहुल चिंतन शिविर में शामिल होने बिड़ला सभागार के लिए होटल से निकल गए, तब प्रियंका उनके कमरे में करीब एक घंटे और अकेले ठहरीं। वहीं पर उन्होंने राहुल के भाषण को अंतिम रूप दिया। इसके बाद वह सीधे चिंतन शिविर पहुंचीं, जहां राहुल ने मंच छोड़कर नजदीकी गलियारे में करीब दस मिनट प्रियंका से फिर मुलाकात की।
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तैयारी के लिए मंगवाए थे मुख्य अखबार
सूत्रों ने बताया कि होटल से राहुल व सोनिया गांधी के जाने के बाद प्रियंका ने सभी मुख्य अखबार मंगवाए। सभी की सुर्खियों और कुछ खबरों को निकाला और भाषण की रूपरेखा तैयार करने में जुट गईं। इसके बाद राहुल से मुलाकात करने वह होटल से सीधे चिंतन शिविर पहुंची थीं, यहां करीब 15 मिनट ठहरीं। प्रियंका जिस तरह एकाएक होटल पहुंचीं थी, ठीक उसी तरह शिविर में भी पहुंची। फिर, वहां से जल्द ही रणथंभौर बाघ अभयारण्य के लिए रवाना हो गईं।
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...और सभी को भा गया भाषण
शिविर के पहले दो दिन प्रियंका का जिक्र तक नहीं हुआ, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय भी बन गया था। मगर तीसरे दिन उनका एकाएक जयपुर पहुंचना एक बड़े कारण की ओर इशारा कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक भाषण में भावुकता और दृढ़ता का मिश्रण मुख्य रूप से प्रियंका की ही सोच का नतीजा रहा। जब राहुल ने अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र किया और नया पद मिलने के बाद सोनिया गांधी की उनसे (राहुल) पहली मुलाकात के दौरान रो पड़ने की बात कही, तो भाषण सभी के दिलों को छू गया। वहीं, जज की भूमिका में रहने की बात भी उन्होंने दृढ़ता के साथ रखी। राहुल के भाषण के दौरान 40 बार से अधिक तालियां बजीं।
शिंदे का बयान नहीं पड़ा भारी
एक बार तो ऐसा लगने लगा था कि केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का हंगामेदार भाषण राहुल गांधी की ताजपोशी पर भारी पड़कर चर्चा का खास विषय बन जाएगा। कुछ घंटे तो मीडिया ने वाकई इस मुद्दे को जबरदस्त तरीके से उठाया। मगर जैसे ही राहुल ने भावों के साथ अपना भाषण दिया, तो मंझे हुए नेता की तरह उन्होंने महफिल लूट ली।