मोदी के खिलाफ बोलीं प्रियंका तो हुआ राहुल का नुकसान?
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मैदान-ए-जंग में लड़ाई अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। करीब 350 सीटों पर खेल हो चुका है और नतीजों का दिन अब केवल 20 रोज दूर रह गया है। ऐसे में बाकी बची सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा, दोनों अपनी तरफ से पूरा जोर लगा रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री भाजपा के खिलाफ प्रचार करने से पहले ही कन्नी काटने लगे थे और सारी कमान राहुल गांधी और सोनिया गांधी के हाथों में थी। आज भी ऐसा ही है। लेकिन अब कांग्रेस की तरफ से राहुल या सोनिया नहीं, बल्कि प्रियंका गांधी मैदान में हैं।
अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार कर जिम्मा संभाल रहीं प्रियंका ने कुछ दिन पहले से अपना निशाना बदला और हमला किया भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी पर। जाहिर है, इससे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जोश कुलांचे मारने लगा। लेकिन यह दांव कामयाब रहा, तो भी कांग्रेस को कुछ घाटा हुआ। प्रियंका के तेजी से उभरने से राहुल को नुकसान हुआ है।
मोदी के सामने शुरू से कमजोर रहे राहुल?
दरअसल, दस साल सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस लगातार तीसरी बार अपना किला बचाने की कोशिशों में जुटी है। सरकार की पहली पारी में ठीकठाक प्रदर्शन के बाद यूपीए 2 अपने साथ कई विवाद लाया है। भ्रष्टाचार और घोटाले के मामले, नीतिगत मोर्चे पर सुस्ती और कमजोर नेतृत्व के दाग उसके दामन को बार-बार मैला करते रहे हैं।
जैसे यही काफी नहीं था। एक बार चूकने के बाद भाजपा दोबारा लालकृष्ण आडवाणी को मौका देने जा रही थी, लेकिन नरेंद्र मोदी की एंट्री ने सारा खेल बदल दिया। चुनाव प्रचार समिति से पीएम पद के दावेदार तक और दावेदार से चुनाव प्रचार का केंद्र बनने तक, मोदी ने तेजी से सीढ़ियां चढ़ीं।
शुरुआत से कहा जा रहा था कि राहुल गांधी, मोदी के सामने दमदार दावेदार नहीं बन पाएंगे। खुद राहुल भी पहले अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते थे। वो मोदी के बारे में कुछ नहीं कहते थे। लेकिन मोदी की आमद ने कांग्रेस के हमलों का केंद्र भी उन्हीं को बनाने में मजबूर कर दिया।
युवराज ने फिर बदला अंदाज
मजबूरी में आकर राहुल गांधी ने अपना अंदाज बदला और कुछ आक्रामकता दिखी। उन्होंने मोदी पर हमले बोलने शुरू किए। पहले मोदी की पत्नी जशोदाबेन का मामला उठाया, स्नूपगेट उछाल और फिर उनके विकास मॉडल की धज्जियां उड़ानी शुरू कीं।
गुजरात दंगों के दाग झेल रहे मोदी को निशाने पर लेने के लिए उन्होंने आरएसएस की विचारधारा से लेकर महात्मा गांधी और सरदार पटेल, सभी का इस्तेमाल किया। लेकिन फिर भी बात नहीं बनती दिखी।
जाहिर है, सोनिया गांधी को बेटे के पिछड़ने की चिंता सताने लगी, तो वो खुद मैदान में उतरीं। लेकिन बढ़ती उम्र और बीमार रहने के कारण वो पूरा जोर नहीं लगा पा रहीं। लेकिन मोदी पर हमले बोलने का कोई मौका नहीं चूक रहीं।
प्रियंका की आमद ने बदला खेल
लेकिन यह मुकाबला उस वक्त अचानक बदल गया, जब अमेठी और रायबरेली जैसे कांग्रेस के परंपरागत किलों में प्रचार के लिए निकलीं राहुल की बहन प्रियंका ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोला।
दरअसल, इससे पहले वो खुद को सिर्फ इन दो सीटों तक सीमित रखती आई हैं और यहीं की बात करती रही हैं। लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया। अपने भाई और मां के लिए वोट मांगे, लेकिन साथ ही साथ मोदी पर तीखे हमले शुरू किए।
इससे भाजपा जरूर सकपकाई होगी, क्योंकि उसे इस बात का जरा इल्म नहीं था कि ऐन वक्त पर प्रियंका गांधी सामने आकर भाजपा और मोदी, दोनों पर हमले करने लगेगी। जाहिर है, अब उसे राहुल और सोनिया के अलावा प्रियंका के लिए भी अलग इंतजाम करने होंगे।
राहुल की चमक फीकी पड़ी?
प्रियंका ने अमेठी-रायबरेली से भाजपा के पीएम पद के दावेदार पर हमला क्या बोला, राहुल और सोनिया की अगुवाई में सुस्त पड़ा कांग्रेसी कार्यकर्ता अचानक जाग पड़ा। इसमें कोई दो राय नहीं है कि करिश्माई शख्सियत के मामले में प्रियंका, राहुल से बीस साबित होती हैं।
उन्हें लेकर आम लोगों और मीडिया में अजब से खिंचाव है, जो साफ नजर आता है। यही वजह है कि अमेठी में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुमार विश्वास ने पिछले तीन-चार महीने में जो मेहनत की, पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रियंका से मुलाकात और राहुल जिंदाबाद के नाम के नारे लगाकर उसे पल भर में मिट्टी में मिला दिया।
लेकिन इसका एक नुकसान भी हुआ। दरअसल, प्रियंका के सामने आते ही राहुल गांधी कहीं खो गए लगते हैं। कांग्रेस अब तक उन्हें सामने रखकर चुनाव लड़ रही थी और उसका कहना था कि राहुल की अगुवाई में कांग्रेस फिर कमाल कर सकती है।
भाजपा ने लपका मुद्दा
लेकिन प्रियंका के अचानक सक्रिय होने और खुलकर मोदी के खिलाफ बोलने से यह साफ हो गया कि कांग्रेसी नेता सामने कुछ भी कहें, लेकिन उन्हें भी इस बात का डर सता रहा है कि मोदी के सामने राहुल की चमक फीकी पड़ रही है।
रही-सही कसर प्रियंका ने पूरी कर दी है। और भाजपा ने यह जताने का कोई मौका नहीं चूका। जब प्रियंका ने गुजरात के विकास मॉडल पर सवाल उठाए, तो पार्टी ने करारा जवाब दिया।
वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "प्रियंका पहले ये बताएं हैं कि वाड्रा मॉडल ऑफ डेवलपमेंट क्या है? दरअसल, कांग्रेस से यह मान चुकी है कि मोदी के खिलाफ सोनिया और राहुल गांधी नाकाम साबित हो चुके हैं। प्रियंका के अचानक सक्रिय होने की पीछे यही वजह दिखती है।"
राहुल से बेहतर हैं प्रियंका?
दरअसल, यह शुरुआत से कहा जाता रहा है कि राहुल की तुलना में प्रियंका गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिहाज से ज्यादा सही शख्स हैं। हालांकि, कांग्रेस और सोनिया गांधी ने पिछले दस साल से सिर्फ और सिर्फ राहुल को उत्तराधिकारी के रूप में सामने रखा है।
कांग्रेसी कार्यकर्ता और समर्थक प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं और उनके भाषण का अंदाज ज्यादा आत्मीयता के साथ लोगों से जुड़ने में मदद करता है।
कांग्रेस के लगातार ढलने, मोदी के तेजी से उभरने और अब प्रियंका के सामने आने के बाद राहुल गांधी को अपना व्यक्तिगत करिश्मा बचाना कुछ मुश्किल पेश आ सकता है। अगर उन्होंने बहुत जल्द होमवर्क दुरुस्त तरीके से नहीं किया, तो उनकी राजनीतिक पारी में आशंका से कहीं ज्यादा गड्ढे आ सकते हैं!
आते-आते प्रियंका ने देर कर दी
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का एक तबका यह भी मान रहा है कि प्रियंका को सामने लाने में कांग्रेस ने कुछ देर कर दी। इसके अलावा यह भी सच है कि प्रियंका सिर्फ अपने भाई और मां के लोकसभा क्षेत्र में प्रचार करती हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं हैं।
ऐसे में उनके विरोधियों को मतदाताओं को यह समझाने में ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी कि प्रियंका सिर्फ कुछ वक्त के लिए सामने दिख रही हैं और बहुत जल्द पर्दे के पीछे चले जाएंगी, जैसा अक्सर रहती हैं। अमेठी से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं स्मृति ईरानी ने कहा, "सांसद राहुल हैं, प्रियंका नहीं। इसलिए राहुल को आगे आकर अमेठी की जनता के सवालों के जवाब देने चाहिए।"
दरअसल, यह बात कांग्रेस को भी समझ आ रही है कि प्रियंका को सक्रियता दिखाने में कुछ देर हो चुकी है। साथ ही उसे यह भी पता है कि 12वां खिलाड़ी हौसला बढ़ा सकता है, लेकिन मैच नहीं जिता सकता!