सरकार का ऐलान, नहीं होगा रेलवे का निजीकरण
सरकारी समिति के सुझावों को दरकिनार करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने साफ कर दिया है कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। उनके अनुसार यह हौव्वा उनके द्वारा खड़ा किया जा रहा है, जो किसी तरह का बदलाव नहीं चाहते।
रेलवे पर सरकार का ही नियंत्रण रहेगा और सरकार ही इसे चलाएगी। प्रभु ने यह बात तब कही है जब सरकार की ओर से अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता में गठित समिति ने घाटे में चल रहे रेलवे विभाग के निजीकरण का सुझाव दिया है।
इस समिति के अनुसार सरकार की जिम्मेदारी केवल नीतियां बनाने तक होनी चाहिए जबकि यात्री और माल ढुलाई का काम निजी हाथों में दे देना चाहिए। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार सबसे बड़ी परिवहन सेवा को घाटे से उबारने के लिए निजी हाथों में देने का फैसला कर सकती है पर रेल मंत्री ने इसे पूरी तरह नकार दिया है।
निजीकरण की बातों से गलत संदेश जा रहा
उन्होंने स्पष्ट किया कि निजीकरण की बातों से गलत संदेश जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि संस्था का मालिकाना हक एक हाथ से दूसरे हाथ में चला जाएगा। यह रेलवे में संभव नहीं है।
हम रेलवे की कार्यक्षमता सुधारने के लिए निजी पैसा और तकनीक लाना चाहते हैं। रेल मंत्री से जब निजीकरण के विरोध का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह गैरजरूरी और अनापेक्षित बहस है। हम केवल रेलवे की सेवा में सुधार करना चाहते हैं। इसके लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा। यदि हम इसे खुद कर पाएंगे तो खुद करेंगे और यदि लगेगा कि बाहर से मदद की जरूरत है तो वह भी लेंगे।