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कसाब की फांसी से पहले जेल प्रशासन की तैयारियां

Fri, 23 Nov 2012 08:08 AM IST
नई दिल्ली/मुंबई/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/मुंबई/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 23 Nov 2012 08:08 AM IST
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prison administration preparations before hanging kasab

किसी भी मौत की सजा पाए कैदी को फांसी देने के लिए कुछ प्रक्रिया होती है। इसके तहत फांसी दिए जाने वाले कैदी के वजन का एक बालू और पत्थर का पुतला बनाया जाता है। उसे फंदे पर लटकाकर उसकी प्रेक्टिस की जाती है। कसाब के मामले में भी ऐसा ही हुआ। नागपुर से आए उस जल्लाद ने सुरक्षा रक्षक को उसकी प्रेक्टिस कराई।

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फांसी देने के लिए एक खास प्रकार की रस्सी तैयार की जाती है और तीन-चार दिनों तक इस रस्सी को साबुन और पक्का केला का लेप लगाकर मुलायम किया जाता है। इन सारी प्रक्रिया को जल्लाद ने पूरा किया और उसने उस गांठ को भी तैयार किया, जिससे फांसी पर लटकाने के समय कैदी के गले पर ज्यादा दबाव ना पड़े और बिना किसी तकलीफ के उसकी मौत हो जाए।
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जल्लाद से प्रशिक्षण लेकर सुरक्षाकर्मी ने दी फांसी
शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा कि फांसी की सजा प्राप्त किसी कैदी को जल्लाद की जगह जेल के सुरक्षाकर्मी ने तख्ते पर चढ़ाया और फांसी के फंदे का ट्रीगर पुल किया। प्रशासन को इस बात का डर था कि किसी जल्लाद को बुलाने पर गोपनीयता नहीं बरती जा सकेगी, इसलिए जल्लाद से तीन से चार दिन तक प्रशिक्षण दिलाने के बाद सुरक्षाकर्मी ने कसाब को सूली पर चढ़ाया।
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दरअसल महाराष्ट्र के दो जेलों नागपुर और यरवडा में ही फांसी की सजा दी जाती है इसलिए कसाब के लिए पुणे के यरवडा जेल को चुना गया। गृहमंत्री आर आर पाटिल ने भी इस बात की पुष्टि की कि कसाब को फांसी देने का काम यरवडा जेल के एक सुरक्षाकर्मी ने किया। मिली जानकारी के अनुसार जेल के इस सुरक्षा रक्षक को नागपुर से आए एक जल्लाद ने बकायदा तीन-चार दिनों तक ट्रेनिंग दी।


कसाब की सुरक्षा पर 21 करोड़ का बिल
महाराष्ट्र सरकार ने अजमल कसाब को तो फांसी पर लटका दिया, लेकिन उसकी सुरक्षा पर खर्च हुए करोड़ों रुपए के बिलों का मामला अभी अटका हुआ है। कसाब की सुरक्षा के लिए आईटीबीपी की तैनाती पर 21 करोड़ रुपए का खर्च हुआ था और महाराष्ट्र सरकार ने इसका बिल केंद्र सरकार को भेज दिया है। मगर केंद्र की ओर से इस बारे में अभी कोई जवाब नहीं आया है। बुधवार को फांसी पर लटकाए गए 26/11 के दोषी अजमल कसाब की सुरक्षा में पिछले चार साल से भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की एक टुकड़ी तैनात थी।

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