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'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो करना था, उन्होंने कर दिया'

Sun, 27 Sep 2015 11:52 AM IST
नरेश चंद्रा/(अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत)
नरेश चंद्रा/(अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत) Updated Sun, 27 Sep 2015 11:52 AM IST
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primminister narendra modi opens door of india for world

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो करना था, उन्होंने कर दिया है। प्रधानमंत्री ने दरवाजा खोल दिया और विश्व समुदाय को निवेश के लिए आमंत्रित कर दिया है, लेकिन दरवाजा खुलने के बाद अंदर आने वाले लोगों के लिए और आगे बढ़ना इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

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यह आगे का काम सरकार के मंत्रियों, नौकरशाहों, राज्य सरकारों को मिलकर करना है। ऐसा नहीं होता तो दरवाजा खुलने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा और मोदी की अगली यात्रा काफी फीकी रहेगी। इसलिए यह साल चुनौती भरा है।
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अमेरिका यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की गाड़ी आगे बढ़ने की उम्मीद है। भारत में प्रधानमंत्री के आस-पास के लोग हमेशा मोदी को अच्छी लगने वाली बाते करते हैं, लेकिन जब हमारा प्रधानमंत्री विदेश में होता है तो वहां के लोग खुलकर बाते करते हैं।
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राजनीति हो रही है ज्यादा

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इस बार भी ऐसा देखने को मिला और लग रहा है कि प्रधानमंत्री काफी कुछ समझ कर आएंगे। सबसे बड़ी जरूरत कामकाज में तेजी लाने,नौकरशाही और अन्य में सुधार की है। देश में सड़क, बिजली, पानी समेत तमाम परियोजनाएं रुकी है। यहां कोई योजना आगे बढ़ती है तो उसमें मुकदमेबाजी, अड़ंगेबाजी, अदालत, मध्यस्थता सब शुरू हो जाता है।

इसमें काफी समय लगता है। अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन में ऐसा नहीं होता। जो लोग धंधा करते हैं, पैसा लगाते हैं, उन्हें यह वातावरण तंग करता है।

देश में राजनीति भी कुछ ज्यादा हो रही है। राजनीतिक दल चुनाव के बाद भी लगातार चुनावी मोड में हैं। संसद नहीं चलती, कामकाज रुकता है।

स्वच्छता अभियान की खास चर्चा

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राजनीतिक गतिरोध बना रहता है और विकास पर असर पड़ता है। नौकरशाही खेमे में बंटी है। जबकि अर्थव्यस्था बढ़ रही है। ऐसे में जरूरत केन्द्र, राज्य,राजनीतिक दलों और संस्थाओं को मिलकर काम करने की है।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को लेकर चर्चा हो रही है।भारत अपना पक्ष रख रहा है लेकिन दुनिया के देश इसे लेकर संवेदनशील है। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान की विश्व में काफी चर्चा है, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली से लेकर बंगलूरू तक गंदा नाला बह रहा है, पीने के पानी का संकट है, मेन होल खुले हैं, बच्चे गिर रहे हैं।

राजधानी दिल्ली की भी स्थिति अच्छी नहीं है। इससे भरोसा दरकता है। विश्व बिरादरी में लगता है कि आप(भारत) अपनों के साथ मिलकर काम नहीं कर पा रहे हैं तो वैश्विक बिरादरी के साथ जो वादा करेंगे वह भी पूरा नहीं कर पाएंगे।प्रधानमंत्री के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

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