विजय चौथाईवाले: जिन्हे मोदी कनेक्शन ने दिलाई पहचान
(फोटो The Indian Express से साभार)
आप भारतीय हैं और अमेरका में रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनआरआई समुदाय को संबोधित करने जाएं तो इस बात की गारंटी नहीं कि आपके चाहते हुए भी आपको उस कार्यक्रम में शिरकत करने का मौका मिले।
यह तब तो बिल्कुल भी संभव नहीं है जब आप किसी सामुदायिक संगठन से नहीं जुड़े हैं क्योंकि 80 से 90 प्रतिशत टिकट इसी माध्यम से लोगों तक पहुंचते हैं।
यह बात अमेरिका में रह रहे विजय चौथाईवाले ने कही जो मोदी के आगामी दौरे का सारा इंतजाम देख रहे हैं। चौथाईवाले एक स्वयंसेवक हैं जिन्होंने मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग ली और इस क्षेत्र में काम भी किया।
तो ये है सच!
लेकिन भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने यह काम छोड़ दिया और पार्टी में फॉरेन पॉलिसी डिपार्टमेंट देखने लगे। वो जनरल सेक्रेटरी राम माधव के साथ जुड़कर प्रधानमंत्री मोदी की पहुंच विदेश में बसे भारतीयों तक पहुंचाने के लिए अहम भूमिका अदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में केवल 10 से 15 प्रतिशत लोग सीधे पहुंच पाते हैं। किसी भी कार्यक्रम में वेब आधारित रिजर्वेशन सिस्टम होता है और रजिस्ट्रेशन सामुदायिक संगठनों द्वारा जो कि प्रवासियों तक पहुंचने के लिए अहम रास्ता है।
उन्होंने बीते साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मैडिसन स्क्वायर गार्डेन के कार्यक्रम के दौरान हुई बातों को बताते हुए कहा कि ऑडिएन्स में किसे आना है, किसे नहीं आना है, यह नियम कायदों के आधार पर तय होता है।
कार्यक्रम आपका है, BJP का नहीं
चौथाईवाले हर उस जगह जाते हैं जहां प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करने वाले होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को जिस भी देश में जाना होता है चौथाईवाले वहां जाकर विभिन्न समुदायों के संगठनों के नेताओं से मिलते हैं।
चौथाईवाले प्रायः प्रधानमंत्री मोदी के जाने के पहले उस देश के दौरे पर जाते हैं, जहां पीएम को जाना होता है। उन्होंने कहा कि सिलिकॉन वैली और लंदन के लिए उनका ट्रिप 3 से 4 माह पहले ही तय हो गया था लेकिन टोरंटो के लिए वो 6 हफ्ते पहले गए थे।
चौथाईवाले वे कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में समूहों और व्यक्तियों से बात करनी पड़ती है और उन्हें यह समझाना होता है कि 'यह कार्यक्रम आपका है, न कि भाजपा का'।
सिलिकॉन वैली के बारे में है राय
चौथाईवाले के मुताबिक लोगों को संगठित करना आसान नहीं होता। विभिन्न समुदाय, भाषा और क्षेत्र के लोगों को एक करना होता है। चौथाईवाले ने टिकटों के बारे में बताया कि ये अह्स्तान्तरणीय होते हैं और कार्यक्रम के दौरान आपको आईडेंटिटी प्रूफ के साथ वहां मौजूद होना होता है।
उन्होंने कहा कि हर जगह की ऑडिएन्स अलग होती है जिस वजह से कार्यक्रम आयोजित करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री की सिलिकॉन वैली की यात्रा के संबंध में चौथाईवाले कहते हैं कि इस यात्रा के दौरान एक ओर टेक की दुनिया के महारथी हैं तो दूसरी ओर समुदायों के नेता और पारंपरिक व्यवसायी हैं।
उन्होंने कहा कि यहां दोनों के बीच में समन्वय बनाना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि लंदन की यात्रा थोड़ी सरल होगी क्योंकि वहां अधिकतर गुजराती ही है जो प्रधानमंत्री की पहली यात्रा के लिए इंतजार कर रहे हैं।