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प्रधानमंत्री के श्रीलंका दौरे से चीन को लगी मिर्ची, दी धमकी

Fri, 20 Mar 2015 11:57 PM IST
Updated Fri, 20 Mar 2015 11:57 PM IST
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Prime Minister to visit Sri Lanka provoked China, the threat

चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तमिल बहुल जाफना दौरे को श्रीलंका के मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है। ड्रैगन ने कहा है कि हाल के दिनों में चीन और श्रीलंका से जुड़ी हाल की घटनाएं बीजिंग का ध्यान खींचने के लिए काफी हैं। चीन के एक थिंक टैंक ने शुक्रवार को यह आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया है।

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शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के सहायक अनुसंधानकर्ता लियू जोंगई ने एक लेख में लिखा, ‘मोदी की श्रीलंका दौरे ने चीन समेत कई देशों की मीडिया का ध्यान खींचा है। इनमें से अधिकतर का यह मानना है कि कोलंबो द्वारा चीन के निवेश वाली परियोजनाओं को रोकने से नई दिल्ली बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।’
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चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे इस लेख में कहा गया है, ‘मोदी का तमिल बहुल इलाके जाफना का दौरा करना वास्तव में भारत का श्रीलंका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को दर्शाता है।’
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चीन की साख को नजरअंदाज न करे श्रीलंका

Prime Minister to visit Sri Lanka provoked China, the threat

श्रीलंका की नई सरकार द्वारा डेढ़ अरब डॉलर की कोलंबो बंदरगाह शहर परियोजना समेत पांच अरब डॉलर के निवेश को पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मंजूरी देने की समीक्षा का हवाला देते हुए लेख में कहा गया है, ‘हर छोटा देश खुद को विभिन्न ताकतों के बीच संतुलित रखना चाहता है।

इनमें से कुछ देश बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता का फायदा उठाकर अपने राष्ट्रीय हितों को बढ़ाना चाहता है।’ इन परियोजनाओं को देश की पूर्ववर्ती महिंदा राजपक्षे सरकार द्वारा मंजूरी दी गई थी।

लेख में कहा गया है कि अगर श्रीलंकाई सरकार कुछ खास ताकतों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश में चीन की साख को नजरअंदाज करती है तो उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सम्मान नहीं मिलेगा।

हिंद महासागरीय देशों से रिश्ते मजबूत करना चाहता है भारत

Prime Minister to visit Sri Lanka provoked China, the threat

चीन ने अपनी धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए एक रणनीतिक पहल के तौर पर रेशम मार्ग परियोजना का प्रस्ताव रखा है। लेख में कहा गया है कि चीन को योजना को बढ़ावा देते समय क्षेत्रीय शक्तियों और छोटे देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजदीक से नजर रखनी चाहिए।

लेख में कहा गया है कि भारत के हिंद महासागर के द्वीपीय देशों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक पहुंचे हैं तो ऐसा लगता है कि भारत उनके साथ सैन्य एवं सुरक्षा मामलों में सहयोग बढ़ाकर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।

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