'सोनिया के लिए रबर स्टैंप थे मनमोहन'
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वर्ष 2008 के गर्मी के मौसम में जब भारत-अमेरिका परमाणु करार पर राजनीतिक घमासान चरम पर था, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस्तीफे की धमकी तक दे डाली थी।
उन्होंने कहा था कि अगर यूपीए गठबंधन वामपंथी दलों के दबाव में आया तो वह पद छोड़ देंगे। यही नहीं, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को उनकी जगह किसी दूसरे शख्स के बारे में विचार करने को भी कह दिया था।
प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने अपनी किताब में इस बात का खुलासा किया है। बारू ने 2008 के इस राजनीतिक संकट के दौरान इस्तीफा दे दिया था।
संजय बारू ने किया खुलासा
उन्होंने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने 17 जनवरी को इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष से बात की थी। अगली सुबह सोनिया और प्रणब मुखर्जी उनसे मिलने पीएम आवास पहुंचे थे। प्रधानमंत्री ने उस दिन अपनी सारी मुलाकातें रद्द कर दी थीं।
ऐसे में मीडिया में उनके इस्तीफे को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थीं। बारू ने इस बारे में पीएम से बात की थी और उन्हें मीडिया में कुछ भी न कहने की सलाह भी दी थी।
बारू लिखते हैं कि उन्हें पता चला, सोनिया ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से पीएम को इस्तीफा न देने के लिए मनाने को कहा था। बाद में सरकार को एटमी करार पर आगे बढ़ने की अनुमति मिली। वामदलों ने समर्थन वापस लिया लेकिन मनमोहन सिंह ने संसद में विश्वास मत हासिल कर लिया।
बारू के खुलासों से पीएमओ ने किया किनारा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की पुस्तक में किए गए खुलासे से सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।
पुस्तक में प्रधानमंत्री के सत्ता का दूसरा केंद्र न बनने देने के लिए खुद को हालात के हवाले कर देने और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सत्ता का असली केंद्र बन जाने संबंधी खुलासे संबंधी अमर उजाला में छपी खबर पर पीएमओ ने सफाई दी है।
प्रधानमंत्री के हवाले से पीएमओ ने इन खुलासों और बारू के कई दावों को महज कल्पना की उड़ान बताया है। बयान में पीएमओ ने खुलासों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक विशिष्ट पद के जरिए उच्च आधिकारिक दफ्तर में हासिल की गई पहुंच के व्यावसायिक दुरुपयोग का मामला है।
बवाल के बाद भाजपा ने घेरा
अमर उजाला में छपी इस खबर पर शुरू हुई सियासी गर्मी के तत्काल बाद भाजपा ने इन खुलासों पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी के वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू ने कहा कि पार्टी अरसे से सत्ता का असली केंद्र 10 जनपथ को बताती रही थी।
अब पीएम के मीडिया सलाहकार रहे बारू ने अपनी पुस्तक में पार्टी के इस दावे को सही करार दिया है।
उधर खुलासों पर सियासी सरगमी बढ़ने पर पीएमओ ने प्रधानमंत्री की सलाह के बाद एक बयान जारी कर बारू के खुलासों को कल्पना की उड़ान बताया।
बयान में बारू पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि जाहिर तौर पर यह एक विशिष्ट पद के जरिए उच्च आधिकारिक दफ्तर में हासिल की गई पहुंच के व्यावसायिक दुरुपयोग का मामला है।
सोनिया थीं सत्ता का केंद्र
किताब में कई विवरण काल्पनिक हैं, जिन्हें पूर्व मीडिया सलाहकार ने अपनी नजर से रंग दिए हैं। पूर्व मीडिया सलाहकार के बारे में प्रधानमंत्री अक्टूबर 2013 में संपादकों की एक बैठक के दौरान एक सवाल के जवाब में कह चुके हैं कि उनके सभी बयानों पर विश्वास न किया जाए।
उल्लेखनीय है कि अपनी पुस्तक द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर में बारू ने दावा किया है कि उस समय सोनिया गांधी सत्ता का केंद्र थी। पीएम ने सत्ता का दो केंद्र न बनने देने केलिए खुद को हालत के हवाले कर दिया था।
पुस्तक में कई और खुलासे किए गए हैं। मसलन रक्षा मंत्री एके एंटनी और तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह की मुखालफ करते थे तो कांग्रेस वर्ष 2009 में मिली जीत का श्रेय पीएम को देने के मामले में भी दो फाड़ थी।
पुस्तक में कैबिनेट में प्रधानमंत्री की पसंद के चेहरों को शामिल न करने देने का भी दावा किया गया है।