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अटल बिहारी वाजपेयी का सपना अब मोदी करेंगे पूरा

Thu, 05 Feb 2015 09:13 AM IST
Updated Thu, 05 Feb 2015 09:13 AM IST
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prime minister narendra modi will fullfill dream of atal bihari vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए दिल्ली से मेरठ जाने वाले जिस एक्सप्रेसवे का खाका खींचा था, उसे साकार करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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हालांकि, मंत्रालय के ही कुछ अधिकारियों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ नौकरशाह एवं राजनेताओं ने प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के आसपास हजारों एकड़ जमीन पहले ही खरीद ली है। इसलिए अब वहां एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है, जिससे कि पहले से खरीदी गई जमीन का वाणिज्यिक दोहन हो सके।
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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में एनएच-58 का गाजियाबाद से उत्तराखंड तक का हिस्सा उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपने का प्रस्ताव देने का फैसला हुआ। इसी दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन से मेरठ तक एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना को प्राथमिकता से लागू करने का भी फैसला हुआ।
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कहीं खास लोगों को फायदा पहुंचाने की योजना तो नहीं

prime minister narendra modi will fullfill dream of atal bihari vajpayee

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे परियोजना का खाका खींचा था। उस समय राजमार्ग मंत्री के रूप में बीसी खंडूरी ने इस पर काम भी शुरू किया था, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई होने से पहले ही उनकी सरकार चली गई।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकाल में इसे कोई खास तवज्जो नहीं मिली। इसलिए पिछले साल लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस परियोजना को मुद्दा बनाया था और इसे पूरा करने का वादा किया था। अब राजमार्ग मंत्रालय ने इस पर प्राथमिकता से काम करने का फैसला किया है।

कहीं खास लोगों को फायदा पहुंचाने की योजना तो नहीं

मंत्रालय के कुछ अधिकारी इस सरगर्मी के पीछे अलग ही कारण बताते हैं। उनके मुताबिक मेरठ एक्सप्रेसवे का मंत्रालय में तो अलाइनमेंट तय हो गया है, लेकिन अभी तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस बीच मार्ग की जानकारी रखने वाले कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों ने एक्सप्रेसवे के मार्ग में पड़ने वाले गांवों में हजारों एकड़ जमीन खरीद ली है।

अब वहां एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी की जा रही है ताकि उस जमीन का वाणिज्यिक दोहन हो सके। करीब 65 किलोमीटर के इस एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए उस समय करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई थी। नया आकलन तो तब सामने आएगा जबकि इसका अलाइनमेंट सार्वजनिक हो जाएगा।

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