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प्रधानमंत्री मोदी को कष्ट देते रहेंगे 'एस' नाम वाले

Tue, 27 Oct 2015 01:05 PM IST
आशुतोष चतुर्वेदी/कार्यकारी संपादक, अमर उजाला
आशुतोष चतुर्वेदी/कार्यकारी संपादक, अमर उजाला Updated Tue, 27 Oct 2015 01:05 PM IST
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prime minister narendra modi and Africa summit

अफ्रीका समिट और विदेश यात्रा का योग

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सरकार बनने के बाद मंत्रियों की ख्वाहिश रहती है कि कम से कम सरकारी खर्चे पर कुछ विदेश यात्राएं हों लेकिन मोदी सरकार के मंत्रियों की शिकायत रही है कि उन्हें विदेश यात्रा का एक भी मौका ही नहीं मिल पाया है। मोदीजी खुद तो विदेश यात्रा पर मार मचाए हैं लेकिन मंत्रियों और नौकरशाहों की विदेश यात्राओं पर बहुत कड़ाई है।

अफ्रीका समिट से कूटनीतिक लाभ जो भी हो लेकिन इस बहाने कई राज्य मंत्रियों के पासपोर्ट पर विदेश यात्रा की मोहर जरूर लग गई। मोदीजी ने अफ्रीकी नेताओं को निमंत्रित करने का जिम्मा खासकर राज्य मंत्रियों को सौंपा था। इसमें सबसे लंबा हाथ मारा मुख्तार अब्बास नकवी ने और उन्होंने इस बहाने सबसे अधिक विदेश यात्राएं की। इसके अलावा वीके सिंह, राजीव प्रताप रूढ़ी, धर्मेंद्र प्रधान और राज्यवर्धन राठौड़ को भी निमंत्रित करने के लिए विदेश भेजा गया। इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्दुल फलह सीसी को निमंत्रित करने के लिए तो तीन-तीन मंत्री सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी और मुख्तार अब्बास नकवी गए।
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अफ्रीका समिट का खामियाजा

अफ्रीका समिट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हो रहा है। यह स्टेडियम खेलों के लिए जाना माना है, लेकिन समिट का नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ा है। यहाँ रियो ओलंपिक की तैयारियों के लिए कई खेलों के कैंप का आयोजन होना था लेकिन समिट के कारण इन्हें टाल दिया गया और ये कैंप अभी तक आयोजित नहीं हो पाए हैं। स्टेडियम में महिला बॉक्सिंग का कैंप आयोजित होना था जिसमें मैरी कॉम और सरिता देवी जैसी बॉक्सरों को हिस्सा लेना था। इसके अलावा एथलेटिक्स का भी कैंप लगना था लेकिन समिट के कारण इसे हटाना पड़ा। और जैसा कि भारत में होता है कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती और कहा जाता कि समिट खत्म होने का इंतजार कीजिए और खिलाड़ी समिट के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
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जेटली की ब्रेकफास्ट राजनीति

कहा जाता है कि प्रणब मुखर्जी की राजनीतिक जनसंपर्क की सफलता में उनकी ब्रेकफास्ट राजनीति का बड़ा योगदान है। प्रणब बाबू जब केंद्रीय मंत्री थे तो वे लगभग रोज किसी एक शख्स को ब्रेकफास्ट पर आमंत्रित करते थे। इसमें पक्ष विपक्ष की राजनीतिज्ञ होता था और कभीकभार पत्रकारों को भी मौका मिल जाता था। बताया जाता है कि राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे पत्रकारों से कभीकभार चाय पर चर्चा कर लेते हैं। केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने भी ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी को पकड़ लिया है और अब उनके ब्रेकफास्ट पर रोजाना कोई राजनीतिज्ञ होता है, पर पत्रकारों के लिए वे डिनर का आयोजन करते हैं जिसमें कई बार मोदीजी प्रगट हो जाते हैं। ब्रेकफास्ट मीटिंग अन्य राजनीतिज्ञों में भी लोकप्रिय होती जा रही है। बीसीसीआई उपाध्यक्ष और सांसद राजीव शुक्ला भी चुनिंदा लोगों से ब्रेकफास्ट पर मिलना पसंद करते हैं।


पुछल्ला

ज्योतिषयों का मानना है कि ग्रहों का ऐसा चक्कर है कि प्रधानमंत्री मोदी को 'एस' नाम वालों से कष्ट मिलता रहेगा। इसमें नाम शौरी साहब का है। इन नामों पर गौर करें- स्वामी (सुब्रमण्यम), शौरी अरुण, सिन्हा शत्रुघ्न, सिन्हा यशवंत. और यह सूची और लंबी होती जा रही है, आप भी इसमें कुछ नाम सुझा सकते हैं.

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