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पीएम ने मुलायम, अखिलेश को कराया रात्रि भोज

Sat, 10 Nov 2012 12:14 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 10 Nov 2012 12:14 AM IST
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prime minister manmohan Singh hosts dinner for mulayam singh yadav farooq abdullah

संसद के शीतकालीन सत्र में रिटेल में एफडीआई को लेकर विपक्ष के विरोध और ममता बनर्जी के अविश्वास प्रस्ताव का तोड़ खोजने में जुटे पीएम मनमोहन सिंह ने एक बार फिर डिनर डिप्लोमेसी का सहारा लिया है।

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प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगी और घटक दलों को पाले में लाने की शुरुआत शुक्रवार को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को रात के खाने की टेबल पर लजीज पकवान परोसने के साथ की। खाने की टेबल पर राजनीति समर्थन जुटाने का सिलसिला रविवार को भी मायावती समेत कई अन्य सहयोगी दलों को न्योते के साथ जारी रहेगा।
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प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को मुलायम सिंह, अखिलेश और सपा महासचिव राम गोपाल यादव को डिनर का न्योता दिया। डिनर में नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला भी शरीक हुए। सपा की धुर विरोधी मायावती को अन्य घटक दलों के प्रमुखों के साथ रविवार को आमंत्रित किया गया है।
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सत्र शुरू होने के करीब दो हफ्ते पहले शुरू हुए डिनर डिप्लोमेसी से साफ है कि यूपीए सरकार अपनी नैया उत्तर प्रदेश के इन दो दिग्गजों के सहारे पार लगाने की तैयारी में है। सरकार की चिंता का खास सबब यह है कि एफडीआई के विरोध में यूपीए से नाता तोड़ चुकीं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर रखा है।

भाजपा भी ऐलान कर चुकी है कि अगर ममता सरकार के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाती हैं तो पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। ऐसे में दोनों सदनों में वोट की गणित को देखते हुए सरकार सपा और बसपा पर निर्भर रहेगी।
माना जा रहा है कि खाने की टेबल पर प्रधानमंत्री ने मुलायम सिंह से शीतकालीन सत्र में सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया।

उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक सरकार की कोशिश है बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक को भी पर्दे के पीछे रिझा कर रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर वह वोटिंग से दूर रह कर यूपीए की मदद करें। इसीलिए कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री श्रीकांत जेना के पटनायक सरकार पर खनन घोटाले के लगाए गए आरोपों को तवज्जो नहीं दी है।


दरअसल, सरकार की नजर शीतकालीन सत्र के साथ अगले बजट सत्र पर भी है। सूत्रों के मुताबिक अगर इस सत्र में सरकार की नैया पार लग जाती है तो बजट सत्र में लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा कर सरकार 2014 के चुनाव का ठोस आधार तैयार करेगी।

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