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महंगाई की एक और तगड़ी डोज के लिए रहिए तैयार

Fri, 28 Dec 2012 01:38 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 28 Dec 2012 01:38 AM IST
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prices of diesel and petrol could be raised

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में लोगों को डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली की कीमत में वृद्धि को तैयार रहना चाहिए। पीएम ने यह संकेत 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) को मंजूरी देने के लिए बृहस्पतिवार को बुलाई गई राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में दिए।

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उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात में चालू योजना अवधि के लिए संशोधित आठ फीसदी की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर हासिल करना भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इसलिए ऊर्जा उत्पादों की कीमत बढ़ाना जरूरी है, जिससे कि सब्सिडी का बोझ कम हो सके।
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उन्होंने कहा कि देश में कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस की दरें अंतरराष्ट्रीय कीमत से काफी कम हैं। इनका समायोजन चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए। ऊर्जा सब्सिडी कम करने को केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
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पीएम ने वैश्विक मंदी और घरेलू दिक्कतों का हवाला देते हुए विकास दर में कमी की बात कही है। उन्होंने कहा कि पहले साल में छह फीसदी से कम विकास दर के चलते आठ फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए तीन साल तक नौ फीसदी और अंतिम साल में 11 फीसदी विकास दर की जरूरत होगी।

पीएम ने कहा कि घरेलू समस्याओं को दूर कर अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने की कोशिश की जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि उच्च राजकोषीय घाटे के नकारात्मक परिणाम नजर आ सकते हैं। वैसे सरकार ने सितंबर के बाद कई ऐसे कदम उठाए हैं जो अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन सुधारों को तेज करने की जरूरत है।

पीएम ने कहा कि समावेशी विकास के लिए केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर संसाधन जुटाने होंगे। पंचवर्षीय योजना के लिए बिजली और पानी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने सड़क, रेल, हवाईपत्तन, जलमार्ग और विद्युत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर बल दिया।


साथ ही कहा कि बिजली की कई परियोजनाओं को तमाम विभागों से मंजूरी नहीं मिलने और ईंधन आपूर्ति समझौतों में देरी की समस्या तुरंत हल करने की जरूरत है। इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि देश में नीतिगत मोर्चे पर ठहराव की स्थिति आ गई है। अगर सरकार ने समय रहते सुधारों को लागू नहीं किया तो विकास दर पांच से छह फीसदी के बीच  रह सकती है।

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