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यौन शोषण: गांगुली पर इस्तीफे का दबाव

Wed, 04 Dec 2013 08:32 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 04 Dec 2013 08:32 AM IST
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pressure increase at justice ganguly to resign in sexual assault case

यौन शोषण के आरोपों से घिरे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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तृणमूल कांग्रेस के बाद जदयू और एनसीपी ने भी जस्टिस गांगुली से इस्तीफे की मांग कर दी है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज उनसे पहले ही तत्काल पद छोड़ने की मांग कर चुकी हैं।
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पूर्व आईएएस प्रोमिला शंकर और दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन एसएन सिंह ने तो जस्टिस गांगुली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए चीफ जस्टिस पी सदाशिवम को पत्र लिखा है।
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उन्होंने आग्रह किया है कि चीफ जस्टिस दिल्ली पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दें। शंकर और सिंह ने यह भी कहा है कि गंभीर आरोपों के बाद जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

हालांकि आरोपों से इंकार कर चुके जस्टिस गांगुली का कहना है कि वह अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि मौजूदा हालात में क्या कदम उठाए जाएं। उन्होंने मंगलवार को फिर कहा कि अभी इस बारे में सोचने का वक्त नहीं है।

मालूम हो कि महिला प्रशिक्षु के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद दिग्गज महिला वकील इंदिरा जय सिंह और कामिनी जायसवाल भी जस्टिस गांगुली के इस्तीफे और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर चुकी हैं। मंगलवार को जदयू अध्यक्ष शरद यादव और एनसीपी के तारिक अनवर ने नैतिकता के आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की।

इस्तीफे पर भाजपा में मतभेद
जस्टिस गांगुली के इस्तीफे के सवाल पर मंगलवार को भाजपा में मतभेद भी दिखाई दिए। सुषमा स्वराज की इस्तीफे की मांग के उलट उन्हीं की पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि महज आरोप के आधार पर इस्तीफा मांगना उचित नहीं है।

स्वामी ने परोक्ष रूप से जस्टिस गांगुली के खिलाफ राजनीतिक साजिश रचे जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतजार करने की नसीहत भी दी।

मतभेद सामने आने के बाद भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि सुषमा ने पार्टी की लाइन स्पष्ट की है। मगर जहां तक स्वामी की बात है तो उन्होंने पूरे मामले में तकनीकी से जुड़ी बात सामने रखी है। उनका कहने का अर्थ है कि आरोप साबित होने तक किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

जस्टिस गांगुली को मिला इनका समर्थन
जस्टिस गांगुली पर इस्तीफे के दबाव के बीच कुछ लोग उनके समर्थन में भी आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर के बाद पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने उनका बचाव कर चुके हैं।


मंगलवार को भाकपा के वरिष्ठ नेता गुरुदास दासगुप्ता ने भी जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार करने की सलाह दी, जबकि भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी भी उनके इस्तीफे की मांग को उचित नहीं मानते हैं।

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