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झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगना लगभग तय

Wed, 09 Jan 2013 08:49 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 09 Jan 2013 08:49 PM IST
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president rule in jharkhand likely to be

झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद ने विधानसभा को निलंबित रखने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्र से सिफारिश की है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला लिया जा सकता है।

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वहीं दूसरी ओर प्रदेश में वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए हैं। झामुमो के नेता लगातार कांग्रेस के साथ पर्दे के पीछे बातचीत कर रहे हैं। वार्ता के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के चलते फिलहाल विधानसभा को निलंबित रखकर राष्ट्रपति शासन लगाने की रणनीति बनाई गई है।
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बुधवार को दिनभर झारखंड में कांग्रेस और झामुमो की मिलीजुली सरकार गठन को लेकर अटकलों का बाजार गरम रहा। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी झामुमो नेताओं की मुलाकात की अटकलें लगती रही। कांग्रेस जहां इस मामले पर खुलकर बोलने से बच रही है तो दूसरी तरफ झामुमो के वरिष्ठ नेता और शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा डाल दिया है।
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उन्होंने संकेत दिया है कि वह कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। दोनों पक्षों में बातचीत का सिलसिला जारी है लेकिन अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

कांग्रेस सरकार बनाने की जल्दबाजी में नहीं दिख रही है। पार्टी का मानना है कि इतनी जल्द प्रदेश में सरकार बनाने की प्रक्रिया में शामिल होकर पार्टी कोई गलत संदेश नहीं देना चाहती है। साथ ही झामुमो को भी पार्टी हाईकमान विश्वसनीय सहयोगी नहीं मानता है।

कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि सत्ता के लिए झामुमो किसी भी हद तक जा सकती है। उसे नियंत्रण में रखना आसान नहीं है। इसलिए तमाम परिस्थितियों का जायजा लेने की जरूरत है। कांग्रेस के सूत्र कह रहे है कि अगर दोनों दलों की सहमति के बाद वैकल्पिक सरकार बनने का रास्ता साफ होता है तो पार्टी हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने पर राजी है।


मगर वह किसी भी सूरत में शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं चाहती है। कांग्रेस का मानना है कि शिबू सोरेन दागी हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस प्रदेश में कमजोर पड़ सकती है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी गलत संदेश जा सकता है।

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