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अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को मंजूरी

Tue, 26 Jan 2016 10:19 PM IST
Updated Tue, 26 Jan 2016 10:19 PM IST
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President rule imposed in Arunachal Pradesh

पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया है। पीटीआई के अनुसार राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी देते हुए राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी है।

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इससे पूर्व कैबिनेट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए सिफारिश की थी। इससे पूर्व अरुणाचल प्रदेश पर मची रार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के केन्द्र सरकार के निर्णय के खिलाफ सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने केन्द्र सरकार के निर्णय को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है।
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अरुणाचल प्रदेश के सीएम नबम तुकी ने केन्द्र के निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान करते हुए कहा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए भारत सरकार को निर्णय का इंतजार करना चाहिए। कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी केन्द्र सरकार की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे राजनीतिक असहिणुता करार दिया था।
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पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने केन्द्र की आलोचना करते हुए इसे जबरन सत्ता हथियाने की चाल बताया था। इसके बाद मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इसे संविधानपीठ को सौंप दिया। अभी भी मामला संविधानपीठ में लंबित है। इसी घमासान के बीच रविवार को केन्द्रीय कैबिनेट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार मामला राष्ट्रपति तक पहुंचा तो उन्होंने भी इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार से सफाई मांगी है। इसी मुद्दे पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति से मुलाकात भी की थी।

कांग्रेस के 21 विधायकों ने की बगावत

President rule imposed in Arunachal Pradesh

गौरबलत है की अरुणाचल विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस को 60 में से 42 सीटें मिलीं। एक क्षेत्रीय पार्टी के विलय के बाद पांच विधायक मिलाकर कांग्रेस के विधायकों की संख्या 47 हो गई। मौजूदा संकट तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के 21 विधायकों ने बगावत कर दी, जिसके बाद नाबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई। इन लोगों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर नाबाम टुकी सरकार को हटाने का प्रयास किया। बाद में, कांग्रेस के 14 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया गया।

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वो सिर्फ अपनी जिम्मेदारी को निभा रही है क्योंकि संविधान के मुताबिक राज्य विधानसभा के दो सत्रों में छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता है। राष्ट्रपति शासन को मंजूरी के बाद नबाम टुकी ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि वो ऐसा ही कुछ करेंगे। हमारी सराकर को शुरू से तंग किया जा रहा था।"

टुकी ने कहा कि वो कानूनी तौर पर इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। टुकी ने कहा कि कांग्रेस के पास अब भी 31 विधायकों के साथ बहुमत है। उन्होंने राज्य के सियासी संकट के लिए फिर भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार बताया। वहीं जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को 'काला दिन' बताया। उन्होंने कहा, "ये गणतंत्र दिवस पर भारतीय गणतंत्र के लिए काला दिन है।" कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, "ये सब केंद्र के इशारे पर हुआ है, वो भी खसकर तब जब मामला कोर्ट में है।"

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