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महिला सुरक्षा अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 04 Feb 2013 12:07 AM IST
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बलात्कार के खिलाफ अध्यादेश पर रविवार को दस्तखत कर दिए। यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से अस्तित्व में आ गया है। संसद को अब छह महीने के अंदर इसे पास करना होगा।
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संसद का बजट सत्र 21 फरवरी से शुरू हो रहा है। शुक्रवार को ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर रोक लगाने के लिए जस्टिस वर्मा समिति के सुझाव के मुताबिक कानून को सख्त बनाने के लिए संशोधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी थी।
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महिला संगठनों ने शनिवार को राष्ट्रपति से इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने की अपील की थी। उनका दावा है कि सरकार ने जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए सुझावों का सही ढंग से अध्ययन किए बिना ही कड़े कानूनों की सिफारिश कर दी है। माकपा ने भी अध्यादेश पारित कराने के सरकार के तरीके को अलोकतांत्रिक करार दिया है।
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गौरतलब है कि कैबिनेट से मंजूर अध्यादेश में बलात्कार के बाद मौत पर दोषी को फांसी का प्रावधान है। अध्यादेश में कहा गया है कि दुष्कर्म के चलते पीड़िता की मौत या उसके मरणासन्न हालत में पहुंचने पर दोषियों को फांसी या ताउम्र कैद की सजा दी जाएगी।
ऐसे मामलों में न्यूनतम 20 साल की सजा देने की बात है। साथ ही तेजाब के हमलों के लिए अलग धारा का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी को 20 साल की सजा हो सकती है।