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असहिष्णुता एवं हिंसा लोकतंत्र के खिलाफ: राष्ट्रपति

Fri, 15 Aug 2014 12:41 AM IST
Updated Fri, 15 Aug 2014 12:41 AM IST
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President pranab mukherjee says progress without peace is difficult

हाल के दिनों में देश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में वृद्धि के बीच राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बृहस्पतिवार कहा कि असहिष्णुता एवं हिंसा लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और आर्थिक, सामाजिक या किसी भी तरह की प्रगति शांति एवं अहिंसा के बिना संभव नहीं है।

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मुखर्जी ने 68वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में भड़काऊ भाषणों पर चिंता जताते हुए कहा कि प्राचीन सभ्यता होने के बावजूद भारत नए सपनों से युक्त आधुनिक राष्ट्र है।
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असहिष्णुता और हिंसा लोकतंत्र की मूल भावना के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि जो लोग उत्तेजित करने वाले, भड़काऊ और जहरीले भाषणों में विश्वास करते हैं, उन्हें भारत के मूल्यों की समझ नहीं है।
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राष्ट्रपति ने कहा कि भारत लोकतंत्र, संतुलन, अंतर एवं अंत: धार्मिक समरसता की मिसाल है। हमें अपने पंथनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा करनी होगी।

कट्टरवाद पर बोले राष्ट्रपत‌ि

President pranab mukherjee says progress without peace is difficult

एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों में जारी कट्टरवाद और भारत पर इसके दुष्परिणामों का उल्लेख करते हुए मुखर्जी ने कहा कि ये लड़के धार्मिक विचारधारा पर आधारित भौगोलिक सत्ता कायम करने के लिए नया नक्शा खींचने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे भारत खारिज करता है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी सुरक्षा तथा विदेश नीतियों में कूटनीति की कोमलता के साथ ही फौलादी ताकत का समावेश करना होगा। उन्होंने भारत की युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 68 वर्ष की आयु में एक देश बहुत युवा होता है।

हमारे पास 21वीं सदी पर वर्चस्व कायम करने के लिए इच्छाशक्ति, ऊर्जा, बुद्धिमता, मूल्य और एकता मौजूद है।

महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर व‌िशेष

President pranab mukherjee says progress without peace is difficult

राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था को विकास का भौतिक हिस्सा और शिक्षा को उसका आत्मिक हिस्सा बताते हुए कहा कि ठोस शिक्षा प्रणाली किसी भी प्रबुद्ध समाज का आधार होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 12 पंचवर्षीय योजना के अंत तक देश 80 प्रतिशत की साक्षरता दर प्राप्त कर चुका होगा।

हालांकि उन्होंने सवाल खड़े किए कि क्या हम यह कह पाएंगे कि हमने अच्छा नागरिक तथा सफल पेशेवर बनने के लिए अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा कौशल प्रदान किए हैं।

मुखर्जी ने पर्यावरण के प्रति सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर 2019 तक भारत को स्वच्छ राष्ट्र बनाने का प्रधानमंत्री का आह्वान सराहनीय है।

और इंतजार नहीं कर सकता गरीब

President pranab mukherjee says progress without peace is difficult

राष्ट्रपति ने कहा कि गरीबी के अभिशाप को समाप्त करना एक निर्णायक चुनौती है। अब नीतियों को गरीबी के उन्मूलन से गरीबी के निर्मूलन की दिशा में केंद्रित होना होगा।

मुखर्जी ने आर्थिक विकास से होने वाले लाभ को निर्धन से निर्धनतम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि निर्धन अब और इंतजार नहीं कर सकता।

देश की अर्थव्यवस्था के सात से आठ प्रतिशत की उच्च विकास दर से बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है, जो समतापूर्ण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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