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दया याचिकाओं पर राष्ट्रपति सख्त, सात को फांसी

Fri, 05 Apr 2013 01:07 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 05 Apr 2013 01:07 AM IST
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president pranab mukherjee rejects mercy plea

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लंबित पड़ीं सभी सात दया याचिकाओं का निपटारा कर जघन्य अपराधों के दोषी नौ लोगों के भविष्य का फैसला कर दिया है।

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राष्ट्रपति ने पांच मामलों में फांसी की सजा बरकरार रखी है, जबकि दो मामलों में मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है।

इन याचिकाओं में 14 साल से लंबित हरियाणा के धर्मपाल का मामला भी शामिल है। धर्मपाल ने रेप के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद पीड़िता के परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दी थी।
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एक अन्य मामले में हरियाणा के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उसके परिवार के आठ सदस्यों को बेटी और दामाद ने जहर देकर मार डाला था। एक अन्य मामले में उत्तर प्रदेश में करीब 27 साल पहले एक व्यक्ति ने एक ही परिवार के 13 लोगों की हत्या कर दी थी।
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आतंकी अफजल गुरू और अजमल कसाब सहित छह लोगों की दया याचिका पर फटाफट निर्णय कर चर्चा में आए राष्ट्रपति ने सात दया याचिकाओं को भी उसी अंदाज में निपटा कर नई मिसाल कायम कर दी है। अब राष्ट्रपति भवन के पास एक भी दया याचिका लंबित नहीं है।

अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सात मामलों में फांसी की सजा पाए नौ लोगो में से किस-किस की सजा उम्र कैद में बदली गई है। वैसे सूत्रों का कहना है कि धर्मपाल की फांसी की सजा बहाल रखी गई है।

उसे फांसी देने की तैयारियां भी शुरू हो गई है। जिन सात दया याचिकाओं को निपटाया गया है उनमें उत्तर प्रदेश की तीन, हरियाणा की दो तथा उत्तराखंड और कर्नाटक की एक-एक याचिकाएं शामिल हैं।

हरियाणा के धर्मपाल ने बलात्कार के मामले में जेल से जमानत पर छूटने के बाद 1993 में पीड़िता के परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दी थी।

प्रदेश से जुड़े दूसरे मामले में बेटी सोनिया ने अपने पति संजीव के साथ मिल कर अपने पूर्व विधायक पिता रेलूराम पुनिया समेत परिवार के आठ सदस्यों की जहर देकर मार डाला था।

उत्तर प्रदेश में 17 अगस्त 1986 को गुरमीत सिंह ने एक ही परिवार के 13 लोगों की हत्या कर दी थी। दूसरे मामले में यूपी के सुरेश और रामजी ने अपने भाई के परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी थी।

यूपी के एक अन्य मामले में जफर अली ने लगभग 11 वर्ष पूर्व अपनी पांच बेटियों और पत्नी की हत्या कर दी थी। राष्ट्रपति ने जिन दया याचिकाओं का निपटारा किया है उनमें से एक मामला कर्नाटक का भी है।

प्रदेश के प्रवीण कुमार ने लगभग बीस साल पहले एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या कर दी थी। एक याचिका उत्तराखंड की भी थी। इस मामले में सुंदर सिंह रेप और हत्या का दोषी है।


गृह मंत्रालय के सूत्रों ने राष्ट्रपति द्वारा सात दया याचिकाओं पर फैसला करने की पुष्टि की है। सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति ने सभी फैसले गृह मंत्रालय की सिफारिशों के अनुरूप ही लिए हैं।

गौरतलब है कि मंत्रालय ने सात मामलों में से पांच में मौत की सजा बहाल रखने और दो में मौत की सजा को उम्र कैद में बदलने की सिफारिश की थी।

दया याचिकाएं जिन पर हुआ फैसला
- गुरमीत सिंह (यूपी, पीलीभीत)- 1986 में एक ही परिवार के 13 लोगों की हत्या का दोषी।
- सुरेश और रामजी (यूपी)- भाई के परिवार के पांच लोगों की हत्या की थी।
- जफर अली (यूपी)- 2002 में पांच बेटियों और पत्नी की हत्या का दोषी।
- धर्मपाल (हरियाणा, सोनीपत)- 1993 में बलात्कार और परिवार के पांच लोगों की हत्या का दोषी।
- सोनिया और संजीव (हरियाणा-हिसार)- बेटी ने पति के साथ मिलकर 2001 में परिवार के आठ लोगों की जहर देकर हत्या कर दी थी। सोनिया पूर्व विधायक रेलूराम पुनिया की बेटी है। जहर दिए जाने से पुनिया की भी मौत हो गई थी।
- सुंदर सिंह (उत्तराखंड)- 1989 में रेप और हत्या का दोषी।
-प्रवीण कुमार (कर्नाटक)- वीरप्पन के सहयोगी ने एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या की थी।

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