नई टीम-नए तेवर के साथ मैदान में उतरेगी भाजपा
संगठन के कामकाज से बुरी तरह नाराज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए नई टीम तैयार करेंगे। दरअसल शनिवार को हुई बैठक में राज्य के ज्यादातर नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से नाता तोड़ने की सलाह तो दी, मगर अपने दम पर अधिकतम 60 सीटों पर ही चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा पाए।
पार्टी ने प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए न कहने वाले पूर्व सांसद और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को किसी भी रूप में राज्य में पार्टी का चेहरा बनाने का मन बनाया है। इसके लिए सिद्धू के समक्ष अप्रैल में राज्यसभा की खाली होने वाली सीट पर चुनाव लड़ने की पेशकश की जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य में शिअद से गठबंधन बनाए रखने के लिए पार्टी के शीर्ष नेता सक्रिय हुए हैं। बताते हैं कि शनिवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पार्टी अध्यक्ष शाह के साथ बैठक कराने में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली की भूमिका अहम रही। जेटली ने आलाकमान को सिद्धू को मना लेने का भी भरोसा दिया है। शनिवार की बैठक से साफ हो गया है कि राज्य में भाजपा-शिअद गठबंधन बरकरार रखेगा, मगर भाजपा इस बार शिअद पर अधिक से अधिक सीट हासिल करने का दबाव डालेगी।
सिद्धू पर पार्टी की नजर
शाह ने विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब के संगठन में आमूलचूल परिवर्तन का मन
बना लिया है। शनिवार को हुई बैठक में शाह नेताओं के जवाब से बार-बार
असंतुष्ट हुए। इस दौरान सरकार में शामिल मंत्रियों ने सरकार की समीक्षा
बैठकों में नहीं बुलाने का आरोप लगाया।
बैठक में जब ज्यादातर नेताओं ने
शिअद से नाता तोड़ने की सलाह दी तो शाह ने अलग-अलग नेताओं से पूछा कि
पार्टी अपने दम पर कितनी सीटों पर दमदार ढंग से चुनाव लड़ सकती है। सवाल
जवाब के बीच यह आंकड़ा 45 से शुरू हो कर 60 सीट पर अटक गया। सूत्रों ने
बताया कि इसके बाद शाह ने पूछा ऐसे में अपने दम पर चुनाव कैसे लड़ा जा सकता
है? बैठक में आम आदमी पार्टी की भी चर्चा हुई।
अध्यक्ष पद के लिए शिअद से नाता तोड़ने की शर्त रखे वाले सिद्धू पर पार्टी की अब भी नजर है। चुनाव में किसी भी रूप में सिद्धू को चेहरा बनाने के लिए उनके समक्ष राज्यसभा में बतौर सांसद भेजे जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अप्रैल में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना की सीट खाली होगी। सिद्धू अगर माने तो इस सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाने के साथ ही उन्हें चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बताते हैं कि जेटली ने आलाकमान को सिद्धू को मना लेने का भरोसा दिया है।