फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Prachi is Pride of the family

हमें लगा जैसे कोई स्वप्न देख रहे हों और...

Sat, 04 Jan 2014 10:23 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 04 Jan 2014 10:23 AM IST
विज्ञापन
Prachi is Pride of the family

अपनी झोली में 'मिस इंडिया अर्थ-2012' का खिताब हासिल करने वाली मेरी बेटी प्राची मिश्रा सचमुच मेरी शान है। शुरुआत में तो मुझे इस बात का रत्ती भर भान नहीं था कि वह अपने लिए अलग राह चुन रही है लेकिन जब उसने यह खिताब जीता और रातोंरात उनकी शोहरत बुलंदी पर पहुंची तो पूरा परिवार चकित रह गया।

विज्ञापन


तब लगा कि प्राची की पहल अनूठी है, उसने वाकई बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सहकर्मियों, परिचितों, रिश्तेदारों सहित तमाम जाने-अनजाने लोगों ने प्राची की सफलता पर इतनी बधाई दी, जितनी मुझे जीवन में कभी नहीं मिली।

विज्ञापन


अच्छे पदों पर नौकरी का अलग मान है लेकिन प्राची ने साबित किया कि 'सेलिब्रिटी' की शोहरत सबसे अलग है। बावजूद इसके खुशी यह है कि उसे 'सेलिब्रिटी' होने का जरा भी गुमान नहीं है। वह पहले जैसे ही सभी से मिलती-जुलती और घर-परिवार के कामों में मां का हाथ भी बंटाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उससे मिलकर कोई अपरिचित यह भूल जाएगा कि उससे उसकी पहली मुलाकात है। वह पहले जैसी ही सरल, सहज और अनुशासित है। अब भी उसके मन में छोटों के लिए वैसा ही प्यार और बड़ों केलिए वैसा ही आदर है।

मैं एडीजे के पद से रिटायर हुआ, सो न्यायिक सेवा के बीच बच्चों को असीमित आजादी नहीं मिली कि वे अपने संस्कारों या लीक से हट सकें। पढ़ाई के प्रति भी पूरी निष्ठा से जुटी रही। फस्र्ट क्लॉस कैरियर बनाना आसान नहीं था।

कंप्यूटर साइंस से बीटेक , फिर एमबीए करके प्राची ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी, आठ महीने नौकरी भी की। वह अपनी धुन की ऐसी पक्की है कि  जो काम सोच लिया, उसे पूरा भी किया।

मिस इंडिया बनने की तमन्ना पहले से रही हो, ऐसा नहीं था। कुछ था उसके भीतर जिसे प्राची ने अपनी मेहनत से संवारा और साकार किया। इसके लिए कोई ट्रेनिंग नहीं ली। बस, अपने व्यक्तित्व, अपनी योग्यता से अपनी मंजिल पा लिया।

बचपन से ही उसे सजने-संवरने का शौक जरूर रहा। वह कुछ अलग सोचती थी। आगरा में 'डाबर गुलावरी कंपटीशन' में उसने यूपी नार्थ में सफलता पाई थी। सजने-संवरने पर सहेलियां जरूर कहती थीं कि 'ऐश्वर्या राय बन रही है।' वह स्कूल-कालेज की गतिविधियों में शामिल होती रही है।


गृहणी होने के बावजूद मां प्रभा मिश्रा ने हमेशा नई सोच, नए विचारों के साथ उसे हमेशा प्रोत्साहित किया। उसकी सफलता पर वह सबसे ज्यादा खुश थीं। खुशी है कि उसे बालीवुड से भी ऑफर मिला और जल्द ही वह 'जालिम दिल्ली' में बतौर अभिनेत्री दिखेगी। उसकी सफलताओं के बाद हमारी सोच भी बदल गई, जैसे लगा हम कोई स्वप्न देख रहे हों और वह सच भी हो रहा है।


विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed