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'ये रेल बजट नहीं, विज़न डॉक्युमेंट है'

Thu, 26 Feb 2015 02:16 PM IST
सुदीप श्रीवास्तव/रेल मामलों के जानकार
सुदीप श्रीवास्तव/रेल मामलों के जानकार Updated Thu, 26 Feb 2015 02:16 PM IST
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Prabhu's railway budget is a 'vision document.'

रेल मामलों के जानकार और सामाजिक कार्यकर्ता सुदीप श्रीवास्तव का कहना है कि सुरेश प्रभु ने 2015-16 के लिए जो रेल बजट पेश किया है वह दरअसल रेल बजट न होकर सरकार का विज़न डॉक्युमेंट या दृष्टिकोण दस्तावेज है। उनका कहना है कि यह बजट मोदी सरकार के असमंजस को भी दर्शाता है।

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अमर उजाला से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि यह बजट यह तो बताता है कि सरकार क्या-क्या करना चाहती है लेकिन यह नहीं बताती कि ठोस रूप से कौन सा काम कब तक हो जाएगा। उन्होंने कहा, "ना तो इसमें नई ट्रेनों की घोषणा है, न नए सर्वे की जानकारी। यह बजट न परिवर्तन की जानकारी देता है कि न नई परियोजनाओं का।"
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उनका मानना है कि मोदी सरकार को इस बजट को पेश करने के लिए लगभग एक साल का समय मिला था अगर वे अभी भी नई ट्रेनों की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं तो यह संसद के सदस्यों के लिए भी बुरा है। अगर सरकार नई ट्रेनों और परियोजनाओं की घोषणा संसद से बाहर करना चाहती है तो जन प्रतिनिधि इस पर अपनी प्रतिक्रिया कहां देंगे या शिकायत कहां करेंगे।
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शिकायतों आदि के लिए नंबर दिए जाने और ऐप बनाए जाने को अनुपयोगी बताते हुए उन्होंने कहा, "शिकायत करने की सुविधा से कुछ नहीं होता अगर आपके पास शिकायतों की कार्रवाई की व्यवस्था नहीं है। शिकायतों के लिए नंबर तो पहले से हैं पिछले एक साल में मैंने ख़ुद कैटरिंग को लेकर 10 से अधिक शिकायतें की हैं लेकिन मेरे पास कोई जानकारी नहीं है कि इस पर कोई कार्रवाई हुई है।"

यात्री किराया न बढ़ाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि रेलवे मंत्रालय में पहले कहा था कि डीजल की दरों में अगर बढ़ोत्तरी होगी तो रेल किराए बढ़ेंगे और अगर दाम घटेंगे तो किराए घटेंगे। डीजल के दाम कम हो गए लेकिन किराए नहीं घटे। इसका मतलब है कि डीजल के दरों में कमी से जो कमाई हो रही है उससे सरकार मुनाफा कमा रही है।


दृष्टिकोण के सवाल पर उन्होंने कहा कि रेल बजट में भी मोदी सरकार का असमंजस साफ दिखता है कि वे निजी कंपनियों को लाना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें पता है कि इस रास्ते से स्थिति तत्काल सुधरने वाली नहीं है। इसलिए वे निजीकरण से बचकर भी चल रहे हैं और सरकारी योजनाओं को बढ़ावा भी नहीं दे पा रहे हैं।

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