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गरीबी के आंकड़ों से अब मोंटेक ने भी झाड़ा पल्ला

Tue, 30 Jul 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Tue, 30 Jul 2013 12:04 AM IST
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poverty figure uproar montek admits flaws in assessing method

गरीबी के नवीनतम आकलन पर हो रही आलोचनाओं को देखते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि आंकड़ों में सुधार किए जाने की जरूरत है।

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उन्होंने स्वीकार किया कि गरीबी के आकलन संबंधी विधि काल्पनिक है। इसके साथ ही अहलूवालिया ने पिछले हफ्ते जारी विवादास्पद आकलन से खुद को अलग कर लिया।

योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि गरीबी के नवीनतम आंकड़े एक विशेष समूह द्वारा सुझाई गई प्रणाली पर आधारित है।

आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 में गरीबों की संख्या घटकर 21.9 फीसदी तक आ गई जबकि 2004-05 के दौरान यह आंकड़ा 37.2 फीसदी था।

अहलूवालिया ने कहा कि वर्तमान आंकड़े जाने माने अर्थशास्त्री सुरेश तेंदुलकर की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा सुझाई गई प्रणाली पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि तेंदुलकर कमेटी के अनुसार देश में गरीबों की संख्या करीब 22 फीसदी है। मैं इससे पूरी तरह से सहमत हूं कि गरीबी रेखा कम है।

इन आंकड़ों पर कांग्रेस समेत अन्य दलों द्वारा सवाल उठाए जाने पर अहलूवालिया ने कहा कि कपिल सिब्बल का कहना है कि वर्तमान प्रणाली काल्पनिक है और इसमें सुधार किया जाना चाहिए। इससे मैं सहमत हूं।
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साथ ही उन्होंने कहा कि नई प्रणाली पर काम किया जा रहा है। यह रंगराजन कमेटी के सुझाई गई प्रणाली पर आधारित होगी। रंगराजन कमेटी के अगले साल के मध्य तक अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।

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