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नित्यानंद को कराना होगा पौरुष परीक्षण

Wed, 03 Sep 2014 09:56 PM IST
Updated Wed, 03 Sep 2014 09:56 PM IST
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Potency test of swami nithyananda.

विवादास्पद स्वामी नित्यानंद को वर्ष 2010 में हुए बलात्कार के एक मामले की जांच के सिलसिले में पौरूष परीक्षण करवाना होगा। क्योंकि इस परीक्षण के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी।

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जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली पीठ ने नित्यानंद को कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया।

पीठ ने 20 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करते हुए विवादित धर्मगुरू की यह परीक्षण करवाने के प्रति अनिच्छा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि बलात्कार के मामलों में दिन पर दिन हो रही वृद्धि को देखते हुए ऐसे परीक्षण आवश्यक हो रहे हैं।
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साथ ही पीठ ने यह भी कहा था कि इस बात का कोई कारण नहीं है कि बलात्कार के मामले में आरोपी को पौरूष परीक्षण क्यों नहीं करवाना चाहिए।  उन्होंने वर्ष 2010 में हुए बलात्कार के मामले में पौरूष परीक्षण करवाने में विलंब के लिए पुलिस पर भी सवाल उठाया था।
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नित्यानंद की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में नित्यानंद तथा उनके चार अनुयाइयों के खिलाफ रामनगरम अदालत द्वारा जारी गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अगस्त को रोक लगा दी थी।

अदालत ने द‌िया आदेश

Potency test of swami nithyananda.

हाईकोर्ट ने नित्यानंद को निर्देश दिए थे कि वह चिकित्सीय परीक्षण के लिए जांच अधिकारी के समक्ष पेश हो और 18 अगस्त को रामनगरम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भी पेश हो।

उसने नित्यानंद और उसके अनुयाइयों की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 28 जुलाई वाले निर्णय पर सवाल उठाते हुए दायर की गई याचिकाओं पर आदेश जारी किए थे।

इन लोगों ने दावा किया था कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इन लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करना न्यायसंगत नहीं है। क्योंकि हाईकोर्ट ने 16 जुलाई के अपने आदेश में 28 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने के निर्देश नहीं दिए थे।

वह तो चार साल से लंबित बलात्कार के मामले की सुनवाई निचली अदालत में करवाने के लिए दी गई तारीख थी। हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को अपने आदेश में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से वर्ष 2012 में जारी किए गए निर्देश को बरकरार रखा था।

उस निर्देश में आपराधिक जांच विभाग की ओर से नित्यानंद के चिकित्सीय परीक्षण के लिए लगाई गई याचिका को मंजूर किया गया था।

विभाग ने इस परीक्षण की मांग इसलिए की थी ताकि पता लगाया जा सके कि नित्यानंद यौन संबंध बनाने के लायक है या नहीं और साथ ही उसके खून एवं आवाज के नमूने लिए जा सकें।

गौरतलब है कि नित्यानंद को मिली नियमित जमानत को देखते हुए हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को जारी आदेश में यह स्पष्ट किया था कि यदि नित्यानंद अपनी मर्जी से जांच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं होता है तो उसे महज चिकित्सीय परीक्षण करवाने और उसके खून एवं आवाज के नमूने एकत्र करने के लिए सीमित समय के लिए हिरासत में लिया जाना चाहिए।

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